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UNHRC में भारत: मानव गरिमा पर दोहरा मापदंड नहीं

मानव गरिमा की रक्षा में दोहरे मापदंड नहीं: UNHRC में भारत

भारत ने UNHRC में मानवाधिकारों और गरिमा की समान रक्षा पर जोर दिया। अरिंदम बागची ने दोहरे मापदंडों और आतंकवाद पीड़ितों की अनदेखी पर चिंता जताई।

मानव गरिमा की रक्षा में दोहरे मापदंड नहीं unhrc में भारत

India at UNHRC: No Double Standards in Protecting Human Dignity |

जिनेवा:  भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के समापन पर सभी के मानवाधिकारों और गरिमा की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। जिनेवा में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने कहा कि मानव जीवन में कोई पदानुक्रम नहीं होना चाहिए और मानव गरिमा की रक्षा में किसी तरह का भेदभाव या दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद के पीड़ितों के मानवाधिकारों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने पर भी खेद जताया।

मानवाधिकारों की रक्षा पर भारत का जोर

जिनेवा स्थित भारतीय स्थायी मिशन के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का एक महीने तक चला 63वां सत्र 7 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुआ। परिषद के सदस्य के रूप में भारत ने सभी लोगों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा के प्रति अपना संकल्प दोहराया। सत्र के मुख्य बिंदुओं को साझा करते हुए बागची ने कहा कि आतंकवाद के पीड़ितों के मानवाधिकारों पर स्पष्ट रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने मानव गरिमा की रक्षा के मामले में चयनात्मक रवैया अपनाने से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विकास के अधिकार को लेकर भारत की मांग

विकास के अधिकार पर भारत का रुख रखते हुए प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने सभी देशों से विकास के अधिकार पर अंतरराष्ट्रीय संधि के मसौदे को जल्द अंतिम रूप देने का आग्रह किया। वहीं, भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर गौरव कुमार ठाकुर ने कहा कि वैश्विक शासन में सुधार, विकास सहयोग और विकासशील देशों को मजबूत आवाज देना भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

जलवायु वित्त और किसानों के हितों पर जोर

जलवायु संबंधी मुद्दों पर भारत ने किसानों को जलवायु के अनुकूल बीजों तक पहुंच उपलब्ध कराने का समर्थन किया। इसके साथ ही विकसित देशों से उनके द्वारा किए गए जलवायु वित्त संबंधी वादों को पूरा करने की मांग भी उठाई गई। भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकासशील देशों को आवश्यक सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराने के महत्व को रेखांकित किया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समावेशी बनाने की अपील

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के मुद्दे पर भारतीय मिशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण को प्रमुखता दी, जिसे नई दिल्ली AI इम्पैक्ट समिट में सामने रखा गया था। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने कहा कि AI का लोकतंत्रीकरण होना चाहिए और इसे समावेशन तथा सशक्तीकरण का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए इसकी पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया।

विदेशों में भारतीय कामगारों के अधिकारों का मुद्दा

विदेशों में रहने वाले भारतीयों के अधिकारों पर भारत ने वेतन चोरी और पासपोर्ट जब्त किए जाने जैसी समस्याओं से सुरक्षा देने वाले उपायों का समर्थन किया। भारतीय मिशन के अनुसार, विदेशों में भारतीय प्रवासियों का कल्याण सुनिश्चित करना मेजबान देशों की ठोस जिम्मेदारी है। भारत ने तकनीकी सहयोग के लिए संयुक्त राष्ट्र ट्रस्ट फंड और सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा (UPR) प्रक्रिया में अपने योगदान को भी रेखांकित किया। UPR के तहत संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के मानवाधिकार रिकॉर्ड की समीक्षा की जाती है।

जम्मू-कश्मीर पर भारत ने दिया जवाब

सत्र के दौरान भारत ने अपने जवाब देने के अधिकार के तहत विभिन्न मुद्दों पर हस्तक्षेप किया। इनमें जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश को लेकर भारत का पक्ष भी शामिल था। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर क्षितिज त्यागी ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग बताया। उन्होंने 1990 में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का जिक्र करते हुए इसके लिए पाकिस्तान से आए आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया। त्यागी ने पाकिस्तान से आतंकवाद फैलाने और दूसरे क्षेत्रों पर कब्जे की कोशिशों के बजाय विकास पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और कर्ज का भी उल्लेख किया।

नस्लीय भेदभाव के खिलाफ समानता का संदेश

नस्लीय भेदभाव और समानता के मुद्दे पर भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव और कानूनी सलाहकार सुधीर केजे ने महात्मा गांधी के संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समानता और गरिमा के लिए गांधी का ऐतिहासिक संघर्ष नस्लीय भेदभाव के खिलाफ उनकी लड़ाई से शुरू हुआ था। उन्होंने इसे डरबन घोषणा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का आधार बताया।

भारत ने रचनात्मक भागीदारी जारी रखने की बात कही

सत्र के मुख्य बिंदुओं का समापन करते हुए राजदूत अरिंदम बागची ने कहा कि भारत ने इस सत्र के दौरान रचनात्मक रूप से भाग लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने वर्ष के पिछले सत्रों में भी इसी तरह अपनी भागीदारी जारी रखी।

(एएनआई)

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