JSFM ने 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर सिंध में 'काला दिवस' मनाने का ऐलान किया। चेयरमैन सोहेल अब्रो ने विरोध और आत्मनिर्णय की मांग को लेकर बयान जारी किया।
कराची (पाकिस्तान)। 'जेय सिंध फ्रीडम मूवमेंट' (JSFM) ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस, 14 अगस्त को "काला दिवस" घोषित किया है। संगठन के चेयरमैन सोहेल अब्रो ने इस दिन को सिंधी, बलोच, पश्तून, सराइकी, कश्मीरी (PoJK) और गिलगित-बाल्टिस्तानी (PoJK) समुदायों के लिए गुलामी का दिन बताया है।
सिंध भर में काली पट्टी और काले झंडों से विरोध
JSFM के चेयरमैन सोहेल अब्रो ने एक बयान में मंसूर अहमद हब और मुहम्मद ओसामा सूमरो के साथ मिलकर घोषणा की कि संगठन 14 अगस्त, 2026 को पूरे सिंध में विरोध दिवस के रूप में मनाएगा। बयान के मुताबिक, JSFM कार्यकर्ता सिंध भर में अलग-अलग चौराहों पर काली पट्टी बांधेंगे और काले झंडे फहराएंगे। वे पाकिस्तान के भीतर सिंध और अन्य समुदायों पर कब्जे और लगातार हो रहे दमन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
अब्रो ने पाकिस्तान के गठन को बताया 'इतिहास की गलती'
अब्रो ने कहा, "1947 से पहले पाकिस्तान का कोई अस्तित्व नहीं था, जबकि सिंध हजारों वर्षों से एक स्वतंत्र भूमि रही है।" उन्होंने पाकिस्तान की स्थापना को इतिहास की गलती और मानवता के लिए काला दिन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंधी, बलोच, सराइकी, कश्मीरी और पश्तून जैसे ऐतिहासिक समुदायों को पाकिस्तानी राज्य और उसकी पंजाबी-प्रधान सैन्य व्यवस्था ने गुलाम बना लिया है। अब्रो के मुताबिक, इन समुदायों को लगातार राजनीतिक, आर्थिक और भौगोलिक रूप से हाशिए पर धकेला गया है और उनकी गुलामी आज भी जारी है।
सिंध की जमीन और संसाधनों पर कब्जे का आरोप
अब्रो ने आरोप लगाया, "हमारी जमीन, राष्ट्रीय संसाधनों और मातृभूमि पर पंजाबी सेना बंदूक के दम पर कब्जा कर रही है।" उन्होंने कहा कि आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता का अधिकार संबंधित लोगों का जन्मसिद्ध अधिकार है। उन्होंने आगे दावा किया कि उनका संगठन अंततः पाकिस्तान से स्वतंत्रता हासिल करने का अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेगा।
कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई और जबरन गायब करने का दावा
JSFM अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि जैसे-जैसे 14 अगस्त नजदीक आ रहा है, पाकिस्तानी सरकारी एजेंसियां सिंध में स्वतंत्रता-समर्थक राजनीतिक कार्यकर्ताओं के घरों पर छापेमारी कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पूरे सिंध में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अपहरण और उन्हें जबरन गायब करने की घटनाएं भी जारी हैं। अब्रो ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों, संयुक्त राष्ट्र, एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि वे स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय के उस मकसद का समर्थन करें जिसे उन्होंने अपना लक्ष्य बताया है।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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