लाहौर में इस साल जनवरी से अगस्त के बीच रेप के मामलों में 20 प्रतिशत और गैंगरेप में 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। समा टीवी की रिपोर्ट ने बढ़ते अपराधों को बेनकाब किया है।
लाहौर (पाकिस्तान)। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में चिंताजनक इजाफा दर्ज किया गया है। 'समा टीवी' की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल के पहले आठ महीनों (जनवरी से अगस्त) में बलात्कार (रेप) और सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) के मामलों में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो शहर की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
20% तक बढ़े बलात्कार के आंकड़े
समा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर में इस साल जनवरी से अगस्त के बीच बलात्कार के कुल 498 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 413 मामले सामने आए थे। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि शहर में रेप की घटनाओं में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
गैंगरेप के मामलों में 38% की वृद्धि
केवल एकल मामलों में ही नहीं, बल्कि सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) के मामलों में भी बड़ा उछाल आया है। चालू वर्ष के पहले आठ महीनों में गैंगरेप के 36 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में 26 मामले दर्ज किए गए थे। यह लगभग 38 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी को दर्शाता है।
किन पुलिस डिवीजनों में बढ़ा अपराध?
लाहौर के कई पुलिस डिवीजनों में अपराध का यह ग्राफ ऊपर चढ़ा है:
- सिटी डिवीजन: पिछले साल के पहले आठ महीनों में रेप के 36 मामले दर्ज किए गए थे, जो इस साल बढ़कर 56 हो गए।
- सदर डिवीजन: यहां स्थिति अधिक गंभीर है, जहां मामले 98 से बढ़कर 132 पर पहुंच गए।
- इकबाल टाउन: इस क्षेत्र में दर्ज मामलों की संख्या 46 से छलांग लगाकर 80 पर पहुंच गई।
- मॉडल टाउन डिवीजन: राहत की बात यह रही कि मॉडल टाउन में मामलों की संख्या में कोई बदलाव नहीं आया और दोनों अवधियों में 98 मामले दर्ज किए गए।
डिवीजनों में गैंगरेप का हाल
विभिन्न डिवीजनों में गैंगरेप के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई:
- कैंट डिवीजन: पिछले साल के 5 मामलों की तुलना में इस साल 9 मामले सामने आए।
- मॉडल टाउन: यहां गैंगरेप के मामले दोगुने होकर 5 से सीधे 10 हो गए।
- सिविल लाइंस: पिछले साल 2 मामले थे, जो इस वर्ष बढ़कर 3 हो गए।
- इकबाल टाउन: मामलों की संख्या 4 से बढ़कर 6 हो गई।
- सिटी डिवीजन: यहां पिछले साल 1 मामला था, जो इस साल बढ़कर 2 हो गया।
पुलिस रिकॉर्ड पर एक अहम तकनीकी पहलू
समा टीवी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े केवल उन घटनाओं को दर्शाते हैं जो पुलिस के पास आधिकारिक रूप से दर्ज (Registered) की गई हैं। इसलिए, ये आंकड़े जरूरी नहीं कि शहर में होने वाले यौन उत्पीड़न के कुल मामलों की वास्तविक संख्या हों, बल्कि यह पुलिस थानों तक पहुंचे मामलों का एक चिंताजनक रुझान प्रस्तुत करते हैं।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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