नेपाल के रसुवा में बाढ़ प्रभावित चिलिमे सुरंग में भारतीय और नेपाली सेना का राहत अभियान। पानी निकालने, भारी मशीनरी के लिए रास्ता बनाने और स्वास्थ्य शिविर की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
रसुवा (नेपाल)। नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की तलाश के लिए चलाए जा रहे बचाव अभियान में शुरुआती सफलता मिली है। रसुवा जिले की चिलिमे सुरंग में भारतीय सुरंग बचाव टीम ने नेपाली सेना के साथ मिलकर पानी निकालने और सुरंग के भीतर और गहराई तक खुदाई का काम आगे बढ़ाया है। बचाव अभियान को गति देने के लिए सुरंग तक भारी उपकरण पहुंचाने की दिशा में भी एक अस्थायी रास्ता तैयार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे आने वाले चरणों में राहत और बचाव कार्यों के लिए जरूरी भारी मशीनरी को प्रभावित क्षेत्र तक ले जाना आसान होगा।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बचाव अभियान की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया, "भारतीय सुरंग बचाव टीम ने नेपाली सेना के साथ मिलकर कल चिलिमे सुरंग में और गहराई तक खुदाई की तथा पानी बाहर निकाला। सुरंग तक और भारी उपकरण पहुंचाने के लिए एक अस्थायी रास्ता भी बनाया जा रहा है, और टीम के साथ आए चिकित्सकों ने स्थानीय लोगों के लिए एक स्वास्थ्य शिविर भी लगाया।"
पानी बना बचाव अभियान में बड़ी चुनौती
चिलिमे सुरंग में पानी भरने के कारण बचाव अभियान प्रभावित हो रहा था। इसी चुनौती को देखते हुए भारतीय टीम ने शुक्रवार को सुरंग के भीतर और गहराई तक खुदाई की और पानी बाहर निकालने का काम किया। बचाव अभियान सिर्फ सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने तक सीमित नहीं है। भारी उपकरणों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी मार्ग तैयार करना भी अभियान का अहम हिस्सा है। इससे प्रभावित क्षेत्र में आगे के राहत कार्यों के लिए जरूरी संसाधन पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
भारतीय टीम के साथ चिकित्सक भी मौजूद
भारतीय सुरंग बचाव टीम के साथ आए चिकित्सकों ने स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य शिविर भी लगाया। यानी बचाव दल का फोकस केवल लापता लोगों की तलाश पर नहीं, बल्कि आपदा से प्रभावित स्थानीय आबादी को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर भी है। गौरतलब है कि नेपाल में 26 अगस्त को अचानक आई भयावह बाढ़ ने उत्तरी और मध्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। इस आपदा में 1,344 लोगों की मौत हो गई, जबकि हजारों लोग लापता बताए गए हैं।
सड़कें, पुल और पनबिजली परियोजनाएं तबाह
बाढ़ का असर सिर्फ जनहानि तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में घरों के साथ सड़कें और पुल भी क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं। कई पनबिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इससे बचाव और राहत अभियानों के सामने बुनियादी ढांचे से जुड़ी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। आपदा के बाद अलग-अलग जल विद्युत परियोजना स्थलों पर काम करने वाले कई मजदूर और कर्मचारी लापता हैं। आशंका है कि इनमें से कई लोग सुरंगों के भीतर फंसे हो सकते हैं। ऐसे में सुरंगों तक पहुंच बनाना और वहां से पानी निकालना बचाव अभियान की सबसे अहम प्राथमिकताओं में शामिल है।
भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें जुटीं
नेपाल की बचाव टीम को भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी सहायता दे रही हैं। दोनों देशों की विशेषज्ञ टीमें उन मजदूरों और कर्मचारियों का पता लगाने में मदद कर रही हैं, जो बाढ़ और उसके बाद पैदा हुए हालात के बीच अलग-अलग जल विद्युत परियोजना स्थलों से लापता हुए हैं। भारत ने 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल की मदद के लिए विशेष टीमें भेजी हैं। चिलिमे सुरंग में चल रहा अभियान इसी व्यापक राहत और बचाव प्रयास का हिस्सा है।
स्याब्रूबेसी के पास है चिलिमे परियोजना
चिलिमे जलविद्युत परियोजना स्थल रसुवा जिले के स्याब्रूबेसी गांव के पास स्थित है। यह इलाका 26 अगस्त को नेपाल में आई अचानक बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। फिलहाल बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर पहुंच बनाना, पानी निकालना और भारी उपकरणों की मदद से खोज अभियान को आगे बढ़ाना है। अस्थायी रास्ते का निर्माण और सुरंग में गहराई तक खुदाई इस दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआती कदम माने जा रहे हैं।
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