पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को Ueno बैंक घोटाले के चलते सीनेट ने महाभियोग चलाकर बर्खास्त कर दिया है। इसके तुरंत बाद उपराष्ट्रपति पेड्रो एलियाना ने नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली है।
असुनसियोन (पराग्वे)। पराग्वे की राजनीति में शुक्रवार का दिन भूचाल लेकर आया। देश की सीनेट ने एक ऐतिहासिक फैसले में राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को पद से हटाने के लिए मतदान किया। सीनेट के 45 में से 44 सदस्यों ने उनके खिलाफ महाभियोग का समर्थन किया, जिसके बाद उन्हें तुरंत पद से हाथ धोना पड़ा। उन पर देश के चर्चित 'उएनो बैंक' (Ueno Bank) के ढहने से जुड़े होने और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने देश में एक बड़ा वित्तीय संकट और आपराधिक जांच का दौर शुरू कर दिया है।
राष्ट्रपति पद से हटाए जाने के कुछ ही पलों बाद उपराष्ट्रपति पेड्रो एलियाना ने देश के नए राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाल लिया और शपथ ली। अभियोजक (प्रॉसिक्यूटर) क्रिश्चियन बेनिटेज़ ने मीडिया को बताया कि बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच गुरुवार को ही इस्तीफा देने वाले पेना को फिलहाल नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया है। आपराधिक कार्यवाही के दौरान उनकी हिरासत को लेकर अदालत आगे का फैसला लेगी।
अभियोजक कार्यालय ने स्पष्ट किया कि उएनो बैंक संकट के सिलसिले में उनकी गिरफ्तारी के आदेश पहले ही दिए जा चुके थे। महाभियोग की इस कार्रवाई से उनकी संसदीय छूट (इम्युनिटी) भी समाप्त हो गई है, जिससे उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
वित्तीय संकट और आपराधिक जांच
पराग्वे के अटॉर्नी जनरल ने बैंक के पतन के मामले में पेना और अन्य पूर्व अधिकारियों के खिलाफ कुल तीन आपराधिक जांच शुरू कर दी हैं। ये मामले मुख्य रूप से उएनो बैंक की निगरानी और समाधान प्रक्रिया, संस्थान में सार्वजनिक धन के निवेश और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका से जुड़े हैं। यह पूरा महाभियोग प्रस्ताव विपक्ष के 35 सांसदों और सत्तारूढ़ पार्टी के बागी नेताओं के तीखे आरोपों के बाद लाया गया था।
उन्होंने पेना पर बैंक के साथ अपने संपर्कों के चलते "गंभीर और व्यवस्थित रूप से अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करने" का आरोप लगाया था। हालांकि पेना खुद सीनेट की कार्यवाही में पेश नहीं हुए, लेकिन उनके वकीलों एडोल्फो फेरेरो और रिकार्डो प्रेडा ने सदन में उनका पक्ष रखा। सीनेट ने उनके बचाव के लिए 72 घंटे का अतिरिक्त समय मांगने के अनुरोध को ठुकरा दिया था।
बैंक का दिवालिया होना और जनता का आक्रोश
जब सांसद उनके खिलाफ लगे आरोपों पर बहस कर रहे थे, ठीक उसी समय पेना ने अपना इस्तीफा भेज दिया था। इससे पहले चैंबर ऑफ डेप्युटीज ने सर्वसम्मति से महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने पर मुहर लगाई थी। सीनेटर योलान्डा पेरेडेस ने कड़े शब्दों में कहा, "इस व्यक्ति, सैंटियागो पेना को जेल भेजा जाना चाहिए। उसके खिलाफ तुरंत गिरफ्तारी वारंट जारी होना चाहिए। प्रीट्रायल डिटेंशन, सीधे जेल।"
दूसरी ओर, पेना ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने देश की वित्तीय प्रणाली में अपनी गाढ़ी कमाई बचाने वाले पराग्वे के नागरिकों को आश्वस्त करने के लिए यह कदम उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा, "मैंने देश की स्थिरता, सामाजिक शांति और सार्वजनिक संस्थानों की गरिमा को सुरक्षित रखने की आवश्यकता को सर्वोपरि रखते हुए राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है।"
क्षेत्रीय वित्तीय केंद्र बनने के सपनों को झटका
यह संकट तब भड़का जब पराग्वे के सेंट्रल बैंक ने निजी वित्तीय संस्थान 'उएनो बैंक' में हस्तक्षेप किया, जिसके साथ पेना के व्यावसायिक संबंध जगजाहिर थे। पेना के कार्यकाल में इस बैंक को सोशल सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट (IPS) जैसी प्रमुख सार्वजनिक संस्थाओं से करोड़ों की धनराशि मिली थी। सेंट्रल बैंक की जांच में सामने आया कि वित्तीय विवरणों में सुधार के बाद उएनो बैंक का सॉल्वेंसी रेशियो जरूरी न्यूनतम स्तर के 50 प्रतिशत से भी नीचे लुढ़क गया था। लगभग 61 लाख आबादी वाले इस देश में इस बैंक के करीब 29 लाख ग्राहक थे।
बैंक द्वारा संबंधित कंपनियों को कर्ज देने की तय सीमा का उल्लंघन करने के कारण यह संकट पैदा हुआ। सेंट्रल बैंक की कार्रवाई के बाद लाखों ग्राहक अपनी ही जमा पूंजी तक नहीं पहुंच पाए, जिससे देश भर में कोहराम मच गया, बैंकों के बाहर लंबी कतारें लग गईं और सड़कों पर उग्र प्रदर्शन हुए। गुरुवार रात सेंट्रल बैंक ने राहत देते हुए उएनो बैंक के कुछ ग्राहकों को चरणों में गारंटी भुगतान शुरू करने की घोषणा की है।
राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय समीकरण
महज 44 वर्ष की आयु में अगस्त 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए सत्ता संभालने वाले सैंटियागो पेना पराग्वे के इतिहास में सबसे कम उम्र के राष्ट्रपतियों में गिने जाते हैं। राष्ट्रपति बनने से पहले वे 2015 से 2017 के बीच पूर्व राष्ट्रपति होरासियो कार्टेस के कार्यकाल में वित्त मंत्री रह चुके थे और सेंट्रल बैंक के निदेशक भी रहे थे। कूटनीतिक हलकों में उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन का सबसे कट्टर समर्थक माना जाता रहा है, जिन्होंने आव्रजन और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अमेरिकी प्राथमिकताओं का खुलकर समर्थन किया था।
यह बैंकिंग संकट ऐसे समय में आया है जब पराग्वे दुनिया की दो प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से मान्यता हासिल कर खुद को एक मजबूत क्षेत्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा था। इस पूरे घटनाक्रम ने देश की अर्थव्यवस्था और राजनीतिक साख को तगड़ा झटका दिया है।
(इनपुट: ANI)
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