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व्हाइट हाउस में बड़ा फेरबदल

ट्रम्प न होते तो अमेरिका का अस्तित्व नहीं होता : नए व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर

डोनाल्ड ट्रंप ने स्टीफन मिलर को व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया। CPAC कार्यक्रम में मिलर ने ट्रंप के प्रति अटूट वफादारी और समर्थन का संकल्प दोहराया।

ट्रम्प न होते तो अमेरिका का अस्तित्व नहीं होता  नए व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर

Newly appointed White House Chief of Staff Stephen Miller |

वाशिंगटन (अमेरिका)। डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए स्टीफन मिलर को व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया गया है। सुसी वाइल्स की जगह लेने वाले मिलर ने फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रति अपनी पूर्ण निष्ठा और अटूट वफादारी का संकल्प दोहराया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में सामने आई है जब हालिया मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को महत्वपूर्ण झटके लगे हैं।

सीपीएसी कार्यक्रम में जोरदार भाषण

फ्लोरिडा एस्टेट में आयोजित कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस (CPAC) के सर्कल रिट्रीट एंड गाला कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ट्रम्प ने खुद मंच से मिलर का परिचय कराया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर वायरल हो रहे वीडियो फुटेज के अनुसार, ट्रम्प ने मिलर को 'हॉट कमोडिटी' करार देते हुए उनके कामकाज की सराहना की और उन्हें मंच सौंप दिया। इसके बाद मिलर ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए ट्रम्प के साथ अपने पुराने राजनीतिक सफर को याद किया।

अमेरिका को बचाने का किया दावा

मिलर ने अपने संबोधन में ट्रम्प के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि 2015 में सुनहरे एस्केलेटर से नीचे उतरने के बाद से उनके साथ जुड़ना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है। मिलर ने कहा, "अगर राष्ट्रपति ट्रम्प न होते, तो आज संयुक्त राज्य अमेरिका का अस्तित्व ही नहीं होता। इस इंसान ने अमेरिका को बचाया है। उन्होंने हमारी सेना को बर्बाद होने से बचाया, हमारी अर्थव्यवस्था को तबाह होने से बचाया और देश को आंतरिक व बाहरी खतरों से सुरक्षित रखा।" मिलर ने आगे कहा कि ट्रम्प ने देश के लिए गोलियां झेली हैं और रिपब्लिकन पार्टी को इतिहास के पन्नों में खोने से बचाकर उसे और अधिक मजबूत बनाया है।

राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया

इस चौंकाने वाली नियुक्ति के बाद अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसकी तीखी आलोचना की है। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि यह नियुक्ति उन नीतियों और विचारों पर दोबारा जोर देने जैसा है, जिन्हें हालिया चुनावी नतीजों में मतदाताओं द्वारा स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया जा चुका है। इसके बावजूद मिलर ने स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रपति की सफलता और देश के विकास के लिए अपनी पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे।
(इनपुट: ANI)

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