मानवाधिकार रक्षकों पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि मैरी लॉलर ने बलूच महिला कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
जिनेवा (स्विट्जरलैंड)। मानवाधिकार रक्षकों पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि मैरी लॉलर ने महिलाओं के अधिकारों की कार्यकर्ता डॉ. सबीहा बलूच और उनके परिवार के कथित उत्पीड़न और उन्हें अपराधी ठहराने की कोशिशों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। लॉलर ने अपने बयान में कहा कि उन्हें राज्य के अधिकारियों द्वारा 'बलूच यकजेहती समिति' को लगातार निशाना बनाए जाने के बारे में भी जानकारी मिली है। इससे यह संकेत मिलता है कि ये कार्रवाइयां उनके शांतिपूर्ण मानवाधिकारों की वकालत से जुड़ी हो सकती हैं।
मानवाधिकार रक्षकों को डराना बंद करने की अपील
उन्होंने कहा कि मानवाधिकार रक्षकों के खिलाफ डराना-धमकाना और कानूनी दबाव डालना अस्वीकार्य है। इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों ने अभी तक इन चिंताओं पर कोई जवाब नहीं दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. शाली बलूच, जो 'बलूच महिला मंच' (BWF) की मुख्य आयोजक हैं, ने UNHRC के 61वें सत्र के दौरान एक वीडियो बयान के माध्यम से परिषद को संबोधित किया। उन्होंने इस क्षेत्र की स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कार्यकर्ताओं और राजनीतिक समूहों की बार-बार अपील के बावजूद मानवाधिकारों का उल्लंघन बेरोकटोक जारी है।
बलूच कार्यकर्ताओं ने की दुर्व्यवहारों की निंदा
डॉ. बलूच ने अपने संगठन के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बलूच कार्यकर्ताओं ने लगातार इन कथित दुर्व्यवहारों की निंदा की है और न्याय की मांग की है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने ऐसी मांगों को बड़े पैमाने पर नजरअंदाज किया है। इससे समय के साथ स्थिति और बिगड़ती गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए एक बाद के बयान में उन्होंने बलूचिस्तान में गंभीर और जारी मानवाधिकार संकट के रूप में वर्णित स्थिति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्वसनीय जांच और जवाबदेही तंत्र की कमी ने प्रभावित परिवारों की पीड़ा को और बढ़ा दिया है। इससे वे लंबे समय तक अनिश्चितता और दुख के भंवर में फंसे हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की अपील
डॉ. बलूच ने राष्ट्रीय अधिकारियों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, दोनों से आग्रह किया कि वे स्थिति की गंभीरता को समझें और बलूच लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं। उन्होंने वैश्विक मीडिया संस्थानों से भी आह्वान किया कि वे इस क्षेत्र की स्थितियों पर निष्पक्ष रूप से रिपोर्ट करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सार्थक बदलाव के लिए सभी हितधारकों की ओर से एक एकजुट और सैद्धांतिक प्रतिक्रिया की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि न्याय, सत्य और मानवीय गरिमा को बनाए रखना इस संकट को हल करने के उद्देश्य से किए गए किसी भी प्रयास के केंद्र में होना चाहिए।
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