अमेरिका ने पाकिस्तान से सैन्य और खुफिया बजट में पारदर्शिता बढ़ाने और उन्हें संसदीय निगरानी के दायरे में लाने को कहा है। पाकिस्तान ने रक्षा सेवाओं के लिए 3 ट्रिलियन रुपये का रखा प्रस्ताव है।
वॉशिंगटन डीसी: इस्लामाबाद के रक्षा तंत्र में व्याप्त अपारदर्शिता को उजागर करते हुए, अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान से अपने सैन्य और खुफिया बजटों को नागरिक और संसदीय निगरानी के दायरे में लाने का आह्वान किया है। अपनी 2026 की राजकोषीय पारदर्शिता रिपोर्ट में वॉशिंगटन ने रक्षा व्यय को सार्वजनिक जांच के दायरे में लाने में पाकिस्तान की विफलता, साथ ही सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों के ऋण और कार्यकारी बजट की समय-सीमाओं के खुलासे में कमियों को उजागर किया है।
देश के गुप्त सैन्य और खुफिया व्यय सार्वजनिक और विधायी जवाबदेही से रहे अछूते
रिपोर्ट के अनुसार, जहां पाकिस्तान ने अपने स्वीकृत बजट और साल के अंत के वित्तीय विवरणों को व्यापक रूप से ऑनलाइन उपलब्ध कराया, वहीं देश के गुप्त सैन्य और खुफिया व्यय सार्वजनिक और विधायी जवाबदेही से अछूते रहे। विदेश विभाग ने कहा कि सैन्य और खुफिया बजट पर्याप्त संसदीय या नागरिक सार्वजनिक निगरानी के अधीन नहीं हैं। इस्लामाबाद से राजकोषीय प्रशासन में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में विधायी नियंत्रण स्थापित करने का आग्रह किया।
इस्लामाबाद द्वारा सार्वजनिक ऋण आंकड़ों के प्रबंधन पर जताई गई चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने उचित समय सीमा के भीतर अपना कार्यकारी बजट प्रस्ताव प्रकाशित नहीं किया। सरकार ने ऋण दायित्वों के बारे में सीमित जानकारी ही सार्वजनिक की। इसमें प्रमुख सरकारी उद्यमों का ऋण भी शामिल है। सैन्य और खुफिया बजटों पर पर्याप्त संसदीय या नागरिक सार्वजनिक निगरानी नहीं रखी गई। सैन्य तंत्र के अलावा, इस आकलन में इस्लामाबाद द्वारा सार्वजनिक ऋण आंकड़ों के प्रबंधन पर भी चिंता जताई गई है।
उचित समय सीमा के भीतर कार्यकारी बजट प्रस्ताव नहीं किया गया प्रकाशित
विदेश विभाग ने पाया कि पाकिस्तान ने ऋण दायित्वों के बारे में सीमित जानकारी ही दी, विशेष रूप से प्रमुख सरकारी उद्यमों से जुड़े गुप्त दायित्वों की ओर इशारा किया। रिपोर्ट में पाकिस्तानी सरकार की इस बात के लिए भी आलोचना की गई है कि उसने उचित समय सीमा के भीतर अपना कार्यकारी बजट प्रस्ताव प्रकाशित नहीं किया, जिससे सांसदों और नागरिक समाज को पूर्व-विधायी बहस और जांच के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।
वाशिंगटन ने पाकिस्तान से तीन प्रमुख सुधारात्मक उपाय करने का किया आग्रह
इन वित्तीय कमजोरियों को दूर करने के लिए वाशिंगटन ने पाकिस्तान से तीन प्रमुख सुधारात्मक उपाय करने का आग्रह किया- "उचित समय सीमा के भीतर अपना कार्यकारी बजट प्रस्ताव सार्वजनिक करना, सरकारी उद्यमों सहित सरकारी ऋण दायित्वों के बारे में विस्तृत जानकारी का खुलासा करना, सैन्य और खुफिया एजेंसियों के बजट को संसदीय या नागरिक सार्वजनिक निगरानी के अधीन करना।
वित्त वर्ष 2026-27 में रक्षा सेवाओं के लिए 3 ट्रिलियन रुपये आवंटित करने का रखा प्रस्ताव
रक्षा और ऋण के क्षेत्र में उच्च स्तरीय अपारदर्शिता को उजागर करने के बावजूद, अमेरिकी रिपोर्ट ने पाकिस्तान के व्यापक सार्वजनिक वित्तीय ढांचे में सकारात्मक पहलुओं को स्वीकार किया। इसने पाकिस्तान की सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्था की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्रता के मानकों को पूरा करने के लिए प्रशंसा की और कहा कि इसकी लेखा परीक्षा रिपोर्टें समय पर और ठोस निष्कर्षों के साथ प्रकाशित की जाती हैं। जून में, पाकिस्तान की संघीय सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में रक्षा सेवाओं के लिए 3 ट्रिलियन रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव रखा।
पिछले वित्त वर्ष के प्रारंभिक आवंटन की तुलना में 17.65 प्रतिशत की दर्शाता है वृद्धि
डॉन के अनुसार, यह पिछले वित्त वर्ष के प्रारंभिक आवंटन 2.55 ट्रिलियन रुपये की तुलना में 17.65 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 3 ट्रिलियन रुपये के सैन्य आवंटन से देश के अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 143.6 ट्रिलियन रुपये का लगभग 2.08 प्रतिशत और कुल संघीय व्यय 18.77 ट्रिलियन रुपये का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा बनेगा। इससे सैन्य व्यय कई वर्षों तक जीडीपी के 2 प्रतिशत से थोड़ा नीचे रहने के बाद एक बार फिर इस सीमा को पार कर जाएगा।
पिछले वर्ष के 336.49 बिलियन रुपये से अधिक
वहीं, नागरिक कार्यों पर होने वाला व्यय, जिसमें नई सुविधाओं का निर्माण और सैन्य अवसंरचना का रखरखाव शामिल है, 7.92 प्रतिशत बढ़कर 363.16 बिलियन रुपये होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 336.49 बिलियन रुपये से अधिक है। इसके अतिरिक्त, सैन्य पेंशन को मुख्य रक्षा सेवाओं के बजट से अलग रखा गया है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने संघीय पेंशन आवंटन के तहत सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों के लिए 822 बिलियन रुपये अलग रखे हैं।
रक्षा प्रशासन के लिए आवंटित किए गए 10.9 बिलियन रुपये
रक्षा प्रशासन के लिए 10.9 बिलियन रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में मूल आवंटन 7.9 बिलियन रुपये था, जिसे बाद में बढ़ाकर 11.75 बिलियन रुपये कर दिया गया था। डॉन ने आगे बताया कि प्रमुख सैन्य आयात और रक्षा खरीद के लिए आमतौर पर इस प्राथमिक मद से अलग से धन जुटाया जाता है। इसका खुलासा नहीं किया जाता है।
(इनपुट: ANI)
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