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बहरीन, इराक, सऊदी और अन्य ठिकानों पर भी हलचल

मध्य पूर्व में अमेरिका की सैनिक हलचल, ईरान से संभावित टकराव की बढ़ी आशंका

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने सैन्य कर्मियों की अलग-अलग सैन्य ठिकानों पर तैनाती शुरू कर दी है। अमेरिकी सैनिकों को अज्ञात मिशनों के तहत स्थानांतरित किया जा रहा है।

मध्य पूर्व में अमेरिका की सैनिक हलचल ईरान से संभावित टकराव की बढ़ी आशंका

फाइल फोटो |

वाशिंगटन। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने सैन्य कर्मियों की अलग-अलग सैन्य ठिकानों पर तैनाती शुरू कर दी है। अमेरिकी सैनिकों को अज्ञात मिशनों के तहत स्थानांतरित किया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ईरान के साथ संभावित सैन्य टकराव की आशंकाएं तेज हो गई हैं। 'येरूसलम पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने खुलासा किया है कि पेंटागन अधिकारियों के हवाले से कतर स्थित अल उदीद एयरबेस से सैकड़ों अमेरिकी सैनिकों को हटाया गया है। अल उदद एयर बेस अमेरिका का क्षेत्र में प्रमुख सैन्य अड्डा माना जाता है।

बहरीन से सीरिया तक हाई अलर्ट, पूर्ण युद्ध की आशंका से बढ़ा तनाव

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक इसी तरह की हलचल बहरीन, इराक, सीरिया, कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर भी देखी गई है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय स्थित है। अधिकारियों को आशंका है कि यदि पूर्ण युद्ध की स्थिति बनती है तो क्षेत्र में तैनात लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक ईरान के संभावित निशाने पर हो सकते हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित टकराव जून 2025 में अल उदीद पर हुए हमले से अलग हो सकता है, जब ईरान ने कथित तौर पर अमेरिका को पहले से सूचना दी थी। इस बार स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है।

ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को बताया संभावित लक्ष्य

ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो क्षेत्र में मौजूद उसके सभी सैन्य अड्डे और संपत्तियां वैध लक्ष्य मानी जाएंगी। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत कर रहा है। साथ ही, दो विमानवाहक पोतों को ईरानी सीमा से सुरक्षित दूरी पर रखा गया है, ताकि वे जवाबी कार्रवाई की जद में न आएं। रिपोर्ट के अनुसार, ये तैयारियां लंबे समय तक चलने वाले संभावित संघर्ष को ध्यान में रखकर की जा रही हैं। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन आधिकारिक तौर पर कूटनीतिक समाधान की बात कर रहा है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि तेहरान की मौजूदा पेशकशें ट्रंप को सैन्य कार्रवाई से रोकने के लिए नाकाफी नहीं मानी जा रहीं।

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