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लंबे समय से था तैनात

मरम्मत के लिए स्वदेश लौटेगा एक अमेरिकी विमानवाही पोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड

एक अमेरिकी विमानवाहक पोत अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ कुछ दिनों में पश्चिम एशिया क्षेत्र से हट सकता है। यह युद्धपोत इस क्षेत्र में तैनात अमेरिका के तीन विमानवाहक पोतों में से एक है।

मरम्मत के लिए स्वदेश लौटेगा एक अमेरिकी विमानवाही पोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड

USS Gerald R. Ford Heads Home for Repairs |

वाशिंगटन (अमेरिका)। एक अमेरिकी विमानवाहक पोत अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ कुछ दिनों में पश्चिम एशिया क्षेत्र से हट सकता है। सीबीएस की रिपोर्ट के अनुसार, एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड मध्य पूर्व क्षेत्र छोड़ने वाला है। यह युद्धपोत इस क्षेत्र में तैनात अमेरिका के तीन विमानवाहक पोतों में से एक है।

ईरान पर शिकंजा कसने के लिए तैनात थे तीन युद्धपोत

अमेरिका-ईरान वार्ता में ठहराव के बीच इस विमानवाहक पोत की वापसी से वहां पिछले 10 महीनों से तैनात करीब 4,500 नौसैनिकों को राहत मिलेगी। 'वॉशिंगटन पोस्ट' के अनुसार, क्षेत्र में अन्य दो विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश और यूएसएस अब्राहम लिंकन हैं। यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड लाल सागर में तैनात है, जबकि यूएसएस लिंकन और यूएसएस बुश अरब सागर में हैं। वे ईरानी बंदरगाहों से तेल या सामान ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाते हुए अमेरिकी नाकाबंदी लागू करने में जुटे हैं।

रिकॉर्ड तैनाती के चलते जहाज और नौसैनिकों पर पड़ा भारी असर

हालांकि, फोर्ड की वापसी से इस नाकाबंदी में अमेरिकी ताकत कुछ कम हो सकती है। लेकिन, यह विमानवाहक पोत 309 दिनों से तैनात है, जो किसी भी आधुनिक अमेरिकी पोत के लिए समुद्र में रहने की सबसे लंबी अवधि मानी जा रही है। लंबी तैनाती की वजह से जहाज पर असर भी पड़ा है, जिसमें लॉन्ड्री रूम में आग लगने से कई नौसैनिक घायल हो गए थे और शौचालयों में भी समस्याएं सामने आई थीं।

लंबी तैनाती पर उठे सवाल, रक्षा मंत्री ने दी सफाई

आम तौर पर विमानवाहक पोतों की तैनाती छह से सात महीने की होती है, ताकि उनके रखरखाव का समय निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल सके। जहाज के मई के मध्य तक वर्जीनिया लौटने के बाद इसकी मरम्मत और रखरखाव किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को हुई एक संसदीय सुनवाई के दौरान कई सांसदों ने अमेरिकी रक्षामंत्री पीट हेगसेथ से इस लंबे तैनाती काल को लेकर सवाल किए। इस पर हेगसेथ ने कहा, 'काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया था और इसमें नौसेना से भी परामर्श किया गया था।

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