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पेट्रोल और डीजल पर निर्यात शुल्क में बदलाव

केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर किया, डीजल पर शुल्क घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर किया

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के मद्देनजर केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है।

केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 25 रुपये प्रति लीटर किया डीजल पर शुल्क घटाकर 85 रुपये प्रति लीटर किया

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के मद्देनजर पेट्रोलियम उत्पादों पर करों के आवधिक संशोधन के तहत केंद्र सरकार ने अगले पखवाड़े के लिए पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल निर्यात पर शुल्क घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। संशोधित दरों के तहत, पेट्रोल निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) 0.50 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल निर्यात पर शुल्क 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

निर्यात शुल्क 27 मार्च, 2026 को लागू किए गए

दोनों ईंधनों के निर्यात पर सड़क और अवसंरचना उपकर (RIC) शून्य बना हुआ है। विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) पर निर्यात शुल्क 10.5 रुपये प्रति लीटर पर अपरिवर्तित रखा गया है, जो पूरी तरह से SAED के रूप में लागू होगा। संशोधित दरें 1 अक्टूबर को हुए पिछले संशोधन के बाद 16 अक्टूबर से प्रभावी हो गई हैं। पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यात को हतोत्साहित करके पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क 27 मार्च, 2026 को लागू किए गए थे। सरकार हर पखवाड़े लागू दरों की समीक्षा करती है, जिसमें पिछली समीक्षा के बाद की अवधि के दौरान कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों (पेट्रोल, डीजल और एटीएफ सहित) के औसत अंतरराष्ट्रीय मूल्यों को ध्यान में रखा जाता है।

पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त घरेलू आपूर्ति बनाए रखने की आवश्यकता

नवीनतम संशोधन अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों के सरकार के आवधिक आकलन और पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त घरेलू आपूर्ति बनाए रखने की आवश्यकता को दर्शाता है। इस शुल्क का उद्देश्य अत्यधिक निर्यात को हतोत्साहित करना है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियां निर्यातकों को घरेलू बाजार से आपूर्ति को दूसरी ओर मोड़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं। हालांकि, घरेलू खपत के लिए स्वीकृत पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं है, और संशोधित दरें केवल निर्दिष्ट पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लागू होती हैं।

(इनपुट: ANI)

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