श्चिम एशिया में अमेरिका - 2023 ईरान के बीच जारी तनाव के कारण गैस आपूर्ति में आ रही बाधाओं को देखते हुए सरकारी कोयला कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड सिनगैस बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है।
नयी दिल्ली।
पश्चिम एशिया में अमेरिका - 2023 ईरान के बीच जारी तनाव के कारण गैस आपूर्ति में आ रही बाधाओं को देखते हुए सरकारी कोयला कंपनी "कोल इंडिया लिमिटेड" सिनगैस बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। सिनगैस का निरमा कोयले से होता है और यह परम्परागत इंडस्ट्रियल गैस का देशी विकल्प बन सकता है।
कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोजन (H2}) का मिश्रण
सिनगैस (Syngas), जिसे 'संश्लेषण गैस' (Synthesis Gas) भी कहा जाता है, मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोजन (H2}) का मिश्रण होता है। इसमें कार्बन डाइऑक्साइड (CO 2) और मीथेन (CH 4) की थोड़ी मात्रा भी मौजूद हो सकती है। यह एक उपयोगी औद्योगिक ईंधन है। हालांकि यह गैस खतरनाक भी होती है। कार्बन मोनो आक्साइड की वजह से सिनगैस ज्वलनशील होने के साथ ही जहरीली भी होती है। इसलिए इसके उत्पादन और भंडारण के दौरान रिसाव होने पर सुरक्षा का खतरा हो सकता है। पर फैक्ट्रियों में सुरक्षित माहौल में इसका उपयोग हो सकता है।
कोयला गैसीकरण पर बड़ा निवेश
भारत सरकार पश्चिम एशिया के देशों पर अपनी ऊर्जा निर्भरता को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) के जरिए सिनगैस बनाने पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। कोल इंडिया इसके लिए सिनगैस उत्पादन इकाइयां स्थापित करेगी। सिनगैस आमतौर पर कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण होता है। इसे कोयला, प्राकृतिक गैस या बायोमास से बनाया जाता है और इसका इस्तेमाल बिजली, खाद और ईंधन बनाने में होता है। इसे गैसोलीन के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा सकता है और टर्बाइनों में बिजली उत्पन्न करने के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
कोल इंडिया ने रुचि पत्र भी जारी किए
सूत्रों के अनुसार, कंपनी सिनगैस प्लांट को कोयला खदानों के पास (पिटहेड) लगायेगी या उर्वरक संयंत्रों, गैस से चलने वाले बिजलीघरों और डायरेक्ट-रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआइ) यूनिट्स जैसे इंडस्ट्रियल कंज्यूमर के आसपास स्थापित करेगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार कोल इंडिया ने संभावित बोलीदाताओं की पहचान के लिए रुचि पत्र (ईओआई) भी जारी किये हैं। कोल इंडिया संभावित औद्योगिक ग्राहकों की भी तलाश कर रही है, जो दीर्घकालिक समझौतों के तहत सिनगैस को ईंधन या कच्चे माल के रूप में उपयोग कर सकें। इसके लिए कंपनी ने बाजार की रुचि, आपूर्ति मॉडल और व्यावसायिक अपेक्षाओं का आकलन करने को अलग से ईओआई जारी किया है। इसके तहत कंपनी ने दो मॉडल प्रस्तावित किये हैं। पहले मॉडल के अंतर्गत कोल इंडिया की खदानों के क्षेत्रों में सिनगैस उत्पादन इकाइयां स्थापित की जायेंगी, जहां से आसपास के औद्योगिक संकुलों को पाइपलाइन नेटवर्क के जरिये गैस की आपूर्ति होगी।
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