जीडीपी के स्तर में पिछली छमाही में हुई उल्लेखनीय वृद्धि के बाद प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने वित्त वर्ष 2026 के पूरे वर्ष के लिए वृद्धि अनुमानों को बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत या उससे अधिक कर दी गई है।
अर्थशास्त्रियों ने जीडीपी में 7.5 फीसदी से अधिक वृद्धि दर का अनुमान जताया
जुलाई-सितंबर अवधि में अर्थव्यवस्था सबसे तेज रफ्तार से बढ़ी
नई दिल्ली।
देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के स्तर में पिछली छमाही में हुई उल्लेखनीय वृद्धि के बाद प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने वित्त वर्ष 2026 के पूरे वर्ष के लिए वृद्धि अनुमानों को बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत या उससे अधिक कर दिया है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 8 प्रतिशत दर्ज की गयी थी जो उम्मीदों से काफी अधिक थी।
भारत सरकार के सांख्यिकी विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया गया था कि वित्त वर्ष 2026 की जुलाई-सितंबर अवधि के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था, छह तिमाहियों में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ी जो 8.2 प्रतिशत बढ़ी, जो आधिकारिक और निजी दोनों अनुमानों से काफी अधिक है। इससे उत्साहित अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने अब वित्त वर्ष 2026 के पूरे वर्ष के वृद्धि अनुमानों को बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत या उससे अधिक कर दिया है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने आगामी सत्र में बेहतर जीडीपी की उम्मीद जतायी है। सौम्य कांति घोष ने कहा कि तीसरी तिमाही में 7.5 से 7.7 सौम्य प्रतिशत और चौथी तिमाही में 7 प्रतिशत की वृद्धि के लिहाज से वित्त वर्ष 2026 में समग्र वृद्धि दर लगभग 7.6 प्रतिशत होगी।
एसबीआई ने अपने शोध नोट में बाजार के इंडीकेटरों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) की ऋण वृद्धि धीरे-धीरे बढ़ रही है। 31 अक्टूबर को खत्म हुए पखवाड़े के लिए यह 11.3 फीसदी बढ़ी जबकि, पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान यह 11.8 फीसदी थी। साथ ही जमा 9.7 फीसदी बढ़कर पिछले वर्ष की उसी अवधि के दौरान 11.7 फीसदी हो गई। उन्होंने कहा, 'जीडीपी और एएससीबी (सभी एससीबी) ऋण के बीच वे एकतरफा कारण संबंध है, जिसमें ऋण में वृद्धि के कारण जीडीपी अधिक होती है।'
वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में घटकर लगभग 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद
इसके विपरीत "केयरएज रेटिंग्स" में मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने उम्मीद जतायी है कि जीडीपी वृद्धि दर, वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में घटकर लगभग 7 प्रतिशत रह जाएगी। ऐसा निर्यात के अग्रिम लोडिंग का प्रभाव कम हो जाएगा और त्योहारों के मौसम के बाद खपत की मांग कम हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक, कम आधार प्रभाव कम हो जाएगा। हालांकि, पूरे वर्ष वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी की वृद्धि संख्या को 7.5 प्रतिशत पर मजबूत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी की वृद्धि दर लगभग 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।'
"बिजनेस स्टैंडर्ड" की रिपोर्ट के अनुसार कुछ अन्य रेटिंग एजेंसियों ने भी जीडीपी अनुमान में वृद्धि का संकेत दिया है। इनमें इलारा कैपिटल - 7.5 फीसदी, आईडीएफसी फर्स्ट - 7.6 फीसदी, क्वांटइको रिसर्च - 7.2 केयरएज रेटिंग्स - 7.5, केनरा बैंक - 7.5, एचडीएफसी बैंक - 7.3, मोतीलाल ओसवाल - 7, कोटक महिंद्रा बैंक - 7.4 - 7.8, बैंक ऑफ बड़ौदा - 7.4-7.6, एसबीआई रिसर्च - 7.6 और क्रिसिल - 7 फीसदी का पूर्वानुमान शामिल है।
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