बर्नस्टीन की रिपोर्ट के अनुसार बिजली, कूलिंग और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी चुनौतियों के कारण वैश्विक डेटा सेंटर परियोजनाओं में देरी और रद्द होने की आशंका बढ़ रही है।
Global Data Center Construction Faces Slowdown Amid Power and Supply Constraints |
नई दिल्ली,(भारत)। वैश्विक निवेश एवं शोध फर्म बर्नस्टीन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर निर्माण क्षेत्र अगले कुछ वर्षों में गंभीर चुनौतियों का सामना कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली, कूलिंग और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी बाधाओं के कारण नई परियोजनाओं में देरी और रद्द होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इन चुनौतियों के चलते क्षमता की कमी बनी रहने की संभावना है और स्थिति में उल्लेखनीय सुधार 2026 के बाद ही देखने को मिल सकता है।
2027 तक परियोजनाओं के रद्द होने की रफ्तार और तेज
रिपोर्ट के अनुसार, डेवलपर्स बढ़ती लागत और बुनियादी ढांचे की सीमाओं को देखते हुए अपनी परियोजनाओं का दोबारा मूल्यांकन कर रहे हैं। बर्नस्टीन का अनुमान है, कि 2025 और 2026 के दौरान परियोजनाओं में देरी की लहर देखने को मिलेगी, जबकि 2027 तक परियोजनाओं के रद्द होने की रफ्तार और तेज हो सकती है। इसका असर ऐसे समय में पड़ेगा, जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण डेटा सेंटर क्षमता की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा रद्द
रिपोर्ट में हाइपरस्केलर कंपनियों, कोलोकेशन प्रदाताओं और एंटरप्राइज डेटा सेंटर परियोजनाओं का विश्लेषण किया गया है। इसमें कहा गया है, कि घोषित क्षमता का स्तर भले ही ऊंचा बना हुआ है, लेकिन उसे वास्तविक परिचालन क्षमता में बदलने की गति धीमी पड़ रही है। बर्नस्टीन का अनुमान है, कि वैश्विक स्तर पर घोषित डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा देरी या रद्द होने के जोखिम का सामना कर रहा है। इसके पीछे बिजली ग्रिड कनेक्शन, ट्रांसफार्मर, लिक्विड-कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य आवश्यक उपकरणों की सीमित उपलब्धता प्रमुख कारण बताए गए हैं।
निर्माण लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और यूरोप के प्रमुख डेटा सेंटर बाजार इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं। उत्तरी वर्जीनिया, फ्रैंकफर्ट और लंदन जैसे प्रमुख केंद्रों में नए बिजली कनेक्शन के लिए तीन से चार वर्ष तक का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में कई ऑपरेटर नए प्रोजेक्ट शुरू करने के बजाय मौजूदा परिसरों के विस्तार और द्वितीयक बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। निर्माण लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
ट्रांसफार्मर और स्विचगियर तैयार करने में 80 से 100 सप्ताह तक का समय
बर्नस्टीन के मुताबिक, विद्युत उपकरणों, इस्पात और विशेष तकनीकी श्रमिकों की बढ़ती लागत के कारण प्रति मेगावाट निर्माण खर्च 2023 की तुलना में लगभग 20 से 25 प्रतिशत बढ़ चुका है। वहीं, उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर और स्विचगियर तैयार करने में 80 से 100 सप्ताह तक का समय लग रहा है, जिससे परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में और बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
लंबित परियोजनाओं के पूरे होने से स्थिति में सुधार
हालांकि निकट अवधि में चुनौतियां बनी रहेंगी, लेकिन बर्नस्टीन ने दीर्घकालिक संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, एआई मॉडल के प्रशिक्षण और उपयोग से जुड़ी मांग आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर क्षमता की आवश्यकता को लगातार बढ़ाती रहेगी। कंपनी का अनुमान है, कि 2027 के बाद नए बिजली संयंत्रों के चालू होने, कूलिंग तकनीकों के अधिक मानकीकृत होने और लंबित परियोजनाओं के पूरे होने से स्थिति में सुधार आएगा।
बिजली आवंटन पर निर्भर कंपनियों को अधिक जोखिम
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, कि बड़े हाइपरस्केलर ऑपरेटर भविष्य में एक गीगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले अपने बड़े परिसरों को प्राथमिकता देंगे, जबकि कोलोकेशन प्रदाता उच्च घनत्व वाले और कम बिजली खपत वाले एज डेटा सेंटर विकसित करने पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे। निवेशकों के लिए बर्नस्टीन का मानना है कि जिन कंपनियों के पास पहले से बिजली आपूर्ति और भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित है, उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। इसके विपरीत, भविष्य में बिजली आवंटन पर निर्भर कंपनियों को अधिक जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
डेटा सेंटर उद्योग की दीर्घकालिक मांग मजबूत
वहीं, लिक्विड-कूलिंग तकनीक और बिजली वितरण से जुड़े उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए बेहतर अवसर बनने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार, डेटा सेंटर उद्योग की दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन 2025 और 2026 के दौरान परियोजनाओं में सुस्ती और क्षमता संबंधी दबाव देखने को मिल सकते हैं। इसके बाद दशक के उत्तरार्ध में बाजार के दोबारा गति पकड़ने की उम्मीद है। (ANI)
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