पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 374 अंक लुढ़का और निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ। पढ़ें पूरी खबर।
मुंबई (महाराष्ट्र)। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। महीने के तीसरे कारोबारी सत्र में भी बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। Sensex 374 अंक लुढ़क गया, जबकि Nifty 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। बुधवार के कारोबार में Sensex 373.93 अंक यानी 0.49 फीसदी गिरकर 76,570.35 पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 141.35 अंक यानी 0.59 फीसदी की गिरावट के साथ 23,914.45 पर आ गया।
ऑटो और IT शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो Nifty Auto सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स रहा और इसमें 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद IT सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। सिर्फ चुनिंदा सेक्टर ही नहीं, बल्कि बाजार के सभी ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स भी लाल निशान में बंद हुए। इससे संकेत मिलता है कि बुधवार की बिकवाली किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रही।
BSE पर इन शेयरों ने संभाला मोर्चा
BSE पर Adani Ports, Power Grid, NTPC, Titan, ITC, Reliance, Trent, Bajaj Finance और LT प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। इसके विपरीत Infosys, M&M, Tech Mahindra, SBI, ICICI Bank, Axis Bank, Eternal, IndiGo और Tata Steel ने बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव डाला और प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहे।
NSE पर भी कई दिग्गज शेयरों में बिकवाली
NSE पर Coal India, NTPC, Adani Ports, Power Grid, TMPV, Reliance, ITC, LT, ONGC और Titan प्रमुख गेनर्स में रहे। वहीं, Eicher Motors, Infosys, Sun Pharma, Eternal, Kotak Bank, Grasim, Axis Bank, Trent, Cipla, Hindalco, IndiGo, Hindustan Unilever, SBI Life, BEL और HCL Tech प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।
कच्चा तेल बना भारत के लिए बड़ा मैक्रो रिस्क
कमोडिटी मार्केट में भी निवेशकों की नजर कच्चे तेल पर बनी हुई है। रिपोर्टिंग के समय Brent crude करीब 94.87 डॉलर प्रति बैरल, जबकि crude oil करीब 90.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। मार्केट एनालिस्ट Vipin Dixena के मुताबिक बुधवार की गिरावट को महज सामान्य प्रॉफिट-बुकिंग मानना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल अब भारत के लिए एक बड़े मैक्रोइकोनॉमिक जोखिम के रूप में उभर रहा है।
डिक्सेना ने कहा, "कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये, महंगाई और बॉन्ड यील्ड पर दबाव डाल सकती हैं। साथ ही, इससे आगे मौद्रिक नीति में नरमी की संभावना भी कम हो सकती है। बिकवाली का असर कई सेक्टरों में दिखना बताता है कि आज का रिस्क-ऑफ मूवमेंट बाजार के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं था।"
Nifty 24,000 के नीचे, अब 23,750 अहम सपोर्ट
तकनीकी तस्वीर पर डिक्सेना ने कहा कि Nifty का 24,000 के स्तर से नीचे फिसलना निकट अवधि के बाजार ढांचे को कमजोर करता है। उन्होंने कहा, "तकनीकी नजरिए से Nifty 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया है, जिससे निकट अवधि का स्ट्रक्चर कमजोर हुआ है। अब 23,800-23,750 का जोन महत्वपूर्ण सपोर्ट क्षेत्र बन गया है। इस जोन के नीचे लगातार कमजोरी आगे और गिरावट का रास्ता खोल सकती है, जबकि 24,000-24,100 की ओर किसी भी रिकवरी को अब तत्काल सप्लाई का सामना करना पड़ेगा।"
FIIs के रुख में बदलाव से भारत की कहानी हुई दिलचस्प
हालांकि बाजार की मौजूदा कमजोरी के बीच Kunal Saraogi, Trader/Investor और Market Commentator, भारतीय बाजार के दीर्घकालिक निवेश परिदृश्य को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक नजर आए। साराओगी के मुताबिक हाल के वर्षों में लगातार बिकवाली करने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FIIs अब भारत के प्रति अधिक समर्थनकारी रुख अपनाते दिखाई दे रहे हैं। इससे भारतीय बाजार में निवेश की कहानी पहले की तुलना में और दिलचस्प हो सकती है।
उन्होंने कहा, "भारत में निवेश का मामला अब निश्चित रूप से अधिक दिलचस्प होता जा रहा है। FIIs लगातार और आक्रामक तरीके से बिकवाली कर रहे थे। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में लगातार बिक्री की है। लेकिन मुझे लगता है कि अब इसमें बदलाव की शुरुआत हो रही है। हमने FII के आंकड़ों में सकारात्मकता देखी है। MSA rebalancing की वजह से भी काफी फंड भारत में आ रहा है।" साराओगी ने आगे कहा, "इसलिए आगे चलकर FIIs बाजार को लेकर तेजी का रुख बनाए रखेंगे।"
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