दरअसल भारतीय बाजार में वर्तमान में खाने के तेलों के 650 ग्राम, 700 ग्राम, 810 ग्राम, 850 ग्राम और 870 ग्राम जैसे तरह-तरह के पैक आ गए हैं, जो दिखने में लगभग एक जैसे हैं।
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार देश में खाद्य तेल कंपनियों द्वारा अलग अलग वजन की पैकिंग बाजार में जारी किये जाने से उपभोक्ताओं के बीच बनने के लिए वाले भ्रम को देखते हुए खाने के तेलों के लिए मानक पैक साइज तय करने पर विचार कर रही है।
लीगल मेट्रोलॉजी ने प्रस्ताव पर शुरू की चर्चा
उपभोक्ता मामलों के लीगल मेट्रोलॉजी (Legal Metrology) विभाग ने उद्योग संगठनों के साथ बैठक के बाद इस प्रस्ताव पर है विचार विमर्श शुरू कर दिया है। लीगल मेट्रोलॉजी (Legal Metrology) ने यह कदम उपभोक्ताओं के साथ होने वाली धोखाधड़ी और भ्रम को रोकने के लिए उठाया है। बैठक में इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन, सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सेंट्रल ऑर्गनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड और मस्टर्ड ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बाजार में तरह-तरह के पैक से भ्रम
दरअसल भारतीय बाजार में वर्तमान में खाने के तेलों के 650 ग्राम, 700 ग्राम, 810 ग्राम, 850 ग्राम और 870 ग्राम जैसे तरह-तरह के पैक आ गए हैं, जो दिखने में लगभग एक जैसे हैं। इससे ग्राहकों के लिए कीमतों की तुलना मुश्किल हो जाता है। अब सरकार इसके लिए मानक पैक साइज तय करने पर विचार कर रहा है। उद्योग जगत के संगठनों के अनुसार, पैकेजिंग के आकार में यह असंगति उपभोक्ताओं के लिए मूल्य का सही आकलन करना और सोच-समझकर खरीदारी के निर्णय लेना मुश्किल बना सकती है।
ब्रांडों के बीच कीमतों की तुलना करना जटिल
उपभोक्ता मामलों के सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन समेत सेक्टर के करीब 90% हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन शामिल हुए। उद्योग प्रतिनिधियों ने विभाग को बताया कि बाजार में पैकेजिंग के बढ़ते प्रकारों ने उपभोक्ताओं के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है और ब्रांडों के बीच कीमतों की तुलना करना जटिल बना दिया है।
200 एमएल से लेकर 20 लीटर तक का सुझाव
इन संगठनों ने 200 एमएल से लेकर 20 लीटर तक के मानक पैक साइज सुझाए हैं। चर्चाओं के दौरान, उद्योग संघों ने प्रमुख खाद्य तेलों के लिए मानक पैक आकारों का एक सेट प्रस्तावित किया। सुझाई गई मात्राओं में 200 मिलीलीटर, 500 मिलीलीटर, 1 लीटर, 2 लीटर, 3 लीटर, 4 लीटर, 5 लीटर, 15 लीटर या किलोग्राम और 20 लीटर या किलोग्राम शामिल थे। 200 एमएल से छोटे पैक को इससे बाहर रखने का सुझाव है, ताकि सस्ते छोटे पैक बाजार में उपलब्ध रहें। साथ ही प्रस्ताव के अनुसार, कम मात्रा में पाए जाने वाले खाद्य तेलों को भी इस आवश्यकता से छूट दी जा सकती है।
मानक तय होने पर 2022 की छूट खत्म हो जाएगी
लीगल मेट्रोलॉजी विभाग द्वारा खाद्य तेलों के पेकेटों के मानक तय होने के बाद कंपनियों को 2022 में मिली वह छूट खत्म हो जाएगी, जिसमें मानक पैक साइज की अनिवार्यता हटा दी गई थी। अभी कंपनियों को अपने हिसाब से पैकेजिंग चुनने की आजादी है। नए प्रस्तावित नियम घरेलू और आयातित, दोनों तरह के तेल पर लागू होंगे। प्रस्तावित मानकीकरण व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले खाद्य तेलों जैसे कि ताड़ का तेल, सोयाबीन का तेल, सूरजमुखी का तेल, सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, तिल का तेल, चावल की भूसी का तेल, कपास के बीज का तेल, मक्का का तेल और मिश्रित खाद्य तेलों पर लागू होगा। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब देश में खाद्य तेल की खपत बढ़ रही है। 2020-21 में 2.46 करोड़ टन की खपत 2022-23 में बढ़कर 2.89 करोड़ टन हो गई। प्रति व्यक्ति खपत भी 2000 के दशक की शुरुआत में 8-9 किलो थी, जो अब सालाना 19.7 किलो हो गई है।
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