नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आइपीओ) को इस महीने मंजूरी मिल सकती है। कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने यह जानकारी दी।
चेन्नई। नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आइपीओ) को इस महीने मंजूरी मिल सकती है। कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने यह जानकारी दी। उन्होंने एक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि रेगुलेटर जल्द ही एनएसई को नो-आब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी कर सकता है। इसके बाद आइपीओ की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना एनएसई पर निर्भर करेगा।
कथित डार्क फाइबर बेस के कारण अटकी है NSE की आइपीओ
मालूम हो कि एक कथित डार्क फाइबर बेस की वजह से एनएसई की आइपीओ योजना वर्षों से अटकी हुई है। इस मामले में आरोप थे कि 2010 से 2014 के बीच कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को तेज प्राइवेट कम्यूनिकेशन लाइनों के जरिए एनएसई के को-लोकेशन सर्वर तक खास पहुंच दी गई थी। इससे वे दूसरे बाजार भागीदारों की तुलना में ज्यादा तेजी से ट्रेड कर पाते थे।
लगभग एक दशक से आईपीओ लाने की कोशिश कर रहा NSE
NSE पिछले लगभग एक दशक से आईपीओ लाने की कोशिश कर रहा है। एक्सचेंज ने पहली बार दिसंबर 2016 में ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था, लेकिन उस समय गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों और को-लोकेशन विवाद के कारण प्रक्रिया अटक गई थी। इसके बाद 2019, 2020 और अगस्त 2024 में भी NSE ने सेबी से NOC के लिए संपर्क किया, मगर नियामकीय अड़चनों के चलते मंजूरी नहीं मिल सकी।
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