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इक्रा की रिपोर्ट में ब्याज दर यथावत रहने का अनुमान

मुद्रास्फीति के जोखिमों को देखते हुए आरबीआई पर ब्याज दर बढ़ाने का दबाव

देश में ईंधन की बढ़ती कीमतों और मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए अर्थशास्त्रियों का एक वर्ग आने वाले दिनों में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना जता रहा है।

मुद्रास्फीति के जोखिमों को देखते हुए आरबीआई पर ब्याज दर बढ़ाने का दबाव

मुंबई। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के कारण देश में कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वजह सेे भारतीय रूपये में भारी गिरावट आयी है और देश में महंगाई बढ़ने की आशंका बलवती हो गई है। ऐसे हालात मे भारतीय रिजर्व बैंक पर मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने का दबाव बढ़ गया है। इसे देखते हुए सबकी नजरें अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की जून में होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर टिक गयी हैं।

रेपो रेट में हो सकता है बदलाव

देश में ईंधन की बढ़ती कीमतों और मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए अर्थशास्त्रियों का एक वर्ग आने वाले दिनों में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना जता रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति की चिंताओं को देखते हुए अर्थशास्त्रियों के एक वर्ग का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में बदलाव का बड़ा कदम उठा सकता है।

50 बेसिस पॉइंट्स तक की बढ़ोतरी की संभावना

"स्टैंडर्ड चार्टर्ड" के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, मुद्रास्फीति के दबाव को काबू करने के लिए आरबीआई जून या अगस्त में रेपो रेट (Repo Rate) में 50 बेसिस पॉइंट्स तक की बढ़ोतरी कर सकता है। आरबीआई ने पिछली बैठकों में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था और 'न्यूट्रल' (तटस्थ) रुख बनाए रखा था। ऐसे में जून की बैठक में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आरबीआई बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए दरों में बढ़ोतरी करता है, जो आम जनता की लोन ईएमआई को प्रभावित कर सकती है।

संशोधित मुद्रास्फीति पूर्वानुमान 4.9 प्रतिशत

देश में घरेलू खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में 3.48 प्रतिशत रही थी। लेकिन स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने अब वित्त वर्ष के लिए अपने मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को संशोधित करते हुए 4.9 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले के अनुमान से 20 आधार अंक अधिक है। हालांकि आरबीआई का मुद्रास्फीति लक्ष्य 4 प्रतिशत पर बना हुआ है, जिसमें 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक की सहनशीलता सीमा है।

एक वर्ग का मानना है कि रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रह सकता है

लेकिन बाजार के विशेषज्ञों एक दूसरे वर्ग का मानना है कि महंगाई के बढ़ते जोखिम के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) फिलहाल प्रमुख ब्याज दरों में वृद्धि नहीं करेगा। इनका मत है कि आरबीआई रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है, हालांकि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अपना आकलन प्रस्तुत करते हुए कहा कि तात्कालिक रूप से ब्याज दर यथावत रहने की पूरी संभावना है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, हमें नहीं लगता कि मौद्रिक नीति समिति फिलहाल नीतिगत दरों में वृद्धि करेगी।

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