भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे सत्र में भारी बिकवाली देखने को मिली। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के चलते सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए।
मुंबई (महाराष्ट्र)। वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में भारी गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 22,700 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया।
सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
सेंसेक्स 460.30 अंक या 0.62 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 73,249.39 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि पिछला बंद 73,709.69 था। इसी तरह निफ्टी 123.70 अंक यानी 0.54 प्रतिशत टूटकर 22,687.65 पर बंद हुआ। बाजार में चौतरफा बिकवाली का दबाव साफ तौर पर देखा गया।
सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे बड़ी गिरावट
मीडिया इंडेक्स में सबसे ज्यादा 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद एफएमसीजी (FMCG), मिड-स्मॉल आईटी, टेलीकॉम और आईटी सेक्टर सबसे बड़े लूजर्स रहे।
दिग्गजों की राय और क्रूड ऑयल का संकट
रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा ने कहा, "वैश्विक और घरेलू मैक्रोइकॉनॉमिक चिंताओं का असर बाजार पर है। मध्य पूर्व में तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे आयातित महंगाई का खतरा बढ़ गया है।" रिपोर्ट लिखे जाने के समय ब्रेंट क्रूड करीब 111.82 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट की सलाह
मार्केट एनालिस्ट विपिन डिक्सना का कहना है कि यह गिरावट सिर्फ प्रॉफिट बुकिंग नहीं है। ब्रेंट क्रूड का 110 डॉलर के पार जाना भारत जैसे आयातक देश के लिए बड़ी चुनौती है।
उन्होंने निवेशकों को सलाह देते हुए कहा, "फंडामेंटल नजरिए से निवेशकों को केवल शेयरों की कीमतों में गिरावट देखने के बजाय कंपनियों की अर्निंग्स की क्वालिटी पर फोकस करना चाहिए। मजबूत बैलेंस शीट और बेहतर कैश फ्लो वाली कंपनियां इस दौर में ज्यादा सुरक्षित हैं।"
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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