शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें स्थिर रखने के फैसले से निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिससे सेंसेक्स 905 अंक उछल गया।
नई दिल्ली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले और संस्थागत लिवाली के दम पर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजारों में जोरदार तेजी लौटी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 905.01 अंकों की छलांग लगाकर 74,151.04 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 237.90 अंकों की बढ़त के साथ 22,936.75 का स्तर छुआ।
एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों में जबरदस्त खरीदारी
कारोबार के दौरान निवेशकों का जोखिम उठाने का दायरा (Risk Appetite) बढ़ा। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद घरेलू संस्थागत समर्थन और विदेशी निवेश से बाजार की स्थिति मजबूत हुई है।
नायर ने कहा, "मजबूत उपभोक्ता मांग के चलते एफएमसीजी शेयरों में अच्छी तेजी रही। इसके अलावा फाइनेंशियल, आईटी, रियल्टी और पावर सेक्टर भी मजबूत हुए हैं। मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भागीदारी से बाजार का दायरा व्यापक हुआ है।" हालांकि, बढ़ते इनपुट कॉस्ट, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं आगे भी कंपनियों के लिए चुनौती बनी रह सकती हैं।
निफ्टी के सेक्टर और शेयरों का हाल
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर ऑटो सेक्टर को छोड़कर बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी रियल्टी में 2% से अधिक की जोरदार उछाल आई, जबकि एफएमसीजी और प्राइवेट बैंक शेयरों ने भी बाजार को मजबूती दी। अडानी पोर्ट्स, अडानी एंटरप्राइजेज, पावर ग्रिड और कोटक बैंक सबसे ज्यादा लाभ में रहने वाले शेयर रहे, जबकि ट्रेंट और मारुति के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
रुपये पर दबाव और कमोडिटी मार्केट
ब्रेंट क्रूड ऑयल 114.64 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा है। सर्राफा बाजार में सोने के भाव 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,43,166 रुपये प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) पर आ गए, जबकि चांदी 1.36 प्रतिशत लुढ़ककर 1,91,686 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड राजीव शरण ने रुपये की चाल पर बात करते हुए कहा कि अमेरिकी फेड के फैसले से मिलने वाली राहत सीमित साबित हुई।
"फेड के फैसले के बाद गुरुवार को रुपया 11 पैसे की मजबूती के साथ 95.17 पर खुला था, लेकिन दोपहर तक यह फिसलकर दो हफ्ते के निचले स्तर 95.37 के करीब पहुंच गया," शरण ने बताया। उन्होंने कहा कि डॉलर की मांग और कच्चे तेल के दाम फेड के फैसले पर भारी पड़ रहे हैं।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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