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रिजर्व बैंक अगले महीने रेपो रेट में 0.25 फीसदी..

रिजर्व बैंक अगले महीने रेपो रेट में कर सकता है 0.25 फीसदी की कटौती

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) अगले महीने रेपो रेट में कटौती कर सकती है। हाल के महीनों में महंगाई में लगातार गिरावट को देखते हुए ये अनुमान लगाया जा रहा है। माना जा रहा है कि..

रिजर्व बैंक अगले महीने रेपो रेट में कर सकता है 025 फीसदी की कटौती

रिजर्व बैंक अगले महीने रेपो रेट में कर सकता है 0.25 फीसदी की कटौती |

Repo Rate : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) अगले महीने रेपो रेट में कटौती कर सकती है। हाल के महीनों में महंगाई में लगातार गिरावट को देखते हुए ये अनुमान लगाया जा रहा है। माना जा रहा है कि आरबीआई  25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है। इससे बैंक कर्ज, होम लोन और  EMI कम हो सकती है जिसका बाजार में सकारात्मक संकेत जाएगा और निवेशकों का मनोबल बढ़ेगा। आरबीआई की मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) की बैठक 3-5 दिसंबर के बीच प्रस्तावित है और इसमें ब्याज दरों को लेकर समीक्षा की जाएगी।

"मॉर्गन स्टेनली" की रिपोर्ट में मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान का भी उल्लेख किया गया है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट हो रही है। इस आधार पर उम्मीद जताई गई है कि मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) 2025 के अनुमानित निचले स्तर से 2026-27 में थोड़ा बढ़ेगा और अंततः RBI के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि के लक्ष्य के करीब पहुँच जाएगा। इसे देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी आगामी दिसंबर 2025 की बैठक में  रेपो रेट  में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है।

RBI 25 दिसंबर की नीति बैठक में..

मौद्रिक नीति के संदर्भ में अनुमान है कि RBI 25 दिसंबर की नीति बैठक में दरों में 25 आधार अंकों की कमी करेगा। अगर ऐसा हुआ तो रेपो दर घटकर 5.25% हो जाएगी। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि वर्ष 2025 में निचले स्तर पर रहने के बाद खुदरा महंगाई में 2026-27 में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन यह आरबीआइ के 4% के लक्ष्य के अनुरूप ही रहेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का घरेलू वातावरण तुलनात्मक रूप से मजबूत बना हुआ है। निवेश गतिविधियाँ बढ़ रही हैं, विदेशी मुद्रा भंडार स्थिर है और चालू खाते का घाटा नियंत्रित स्तर पर बना हुआ है। इन परिस्थितियों ने भारत को मौद्रिक नीति में लचीलापन बरतने की क्षमता दी है। वैश्विक वित्तीय फर्म का कहना है कि भारत का चालू खाता घाटा भी जीडीपी के एक प्रतिशत के नीचे बने रहने की उम्मीद है। देश का सेवा निर्यात लगातार बढ़ने की उम्मीद है और इससे भारत का ग्लोबल शेयर 5.1 प्रतिशत रहेगा।

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