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आशा भोंसले का इंदौर-भोपाल से नाता

'सुरों की मलिका' आशा भोंसले का इंदौर व भोपाल से था गहरा नाता

इंदौर/भोपाल। भारतीय पार्श्व गायन की दुनिया का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया। दिग्गज गायिका आशा भोंसले ने 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

सुरों की मलिका आशा भोंसले का इंदौर व भोपाल से था गहरा नाता

Asha Bhosle |

इंदौर/भोपाल। भारतीय पार्श्व गायन की दुनिया का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया। दिग्गज गायिका आशा भोंसले ने 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उन्हें शनिवार शाम को स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार दोपहर उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

बचपन ​इंदौर के छावनी इलाके में बीता

​आशा जी का मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक गहरा और भावनात्मक लगाव था। उनका बचपन इंदौर की छावनी इलाके के मुरई मोहल्ले में बीता था। अपनी यादों में वे अक्सर इंदौर की गलियों और वहां के खान-पान का जिक्र करती थीं।

​मशहूर गुलाब जामुन व रवड़ी पसंद था

उन्हें इंदौर के मशहूर सराफा बाजार की गुलाब जामुन और रबड़ी बहुत प्रिय थी। वे अक्सर अपने बचपन के उन दिनों को याद करती थीं जब वे इन व्यंजनों का आनंद लेती थीं।

सीहोर की ​शरबती गेहूं की रोटियां थी पसंदीदा

उन्हें सीहोर के प्रसिद्ध शरबती गेहूं से बनी रोटियां बेहद पसंद थीं, जिसका स्वाद वे कभी नहीं भूलीं।

​सात दशक का लंबा करियर और 12000 गानें

आशा भोंसले ने अपने सात दशक लंबे करियर में 12,000 से अधिक गाने गाए। उन्होंने न केवल हिंदी बल्कि कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उन्हें पद्म विभूषण और दादा साहब फाल्के पुरस्कार जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया था। उनका जाना संगीत जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा। उनकी आवाज हमेशा हमारे दिलों में गूंजती रहेगी। - मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे...।

भोपाल से भी रहा गहरा नाता

आशा भोंसले का भोपाल से विशेष लगाव रहा था। सन् 1989 में उन्हें भोपाल में प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान' से नवाजा गया था। साल 2011 में उन्होंने भोपाल में एक बेहद यादगार लाइव परफॉर्मेंस दी थी, जिसकी तस्वीरें और वीडियो आज भी उनके प्रशंसकों के जेहन में ताजा हैं।

​हो गया एक युग का अंत

​आशा जी ने अपने करियर में 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लेकर पॉप, गजल और भजन तक हर शैली में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी। महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की है कि उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

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