दिल्ली HC ने 9 वेबसाइटों को 'दृश्यम: द कंक्लूजन' की बिना अनुमति स्ट्रीमिंग, होस्टिंग और डाउनलोड उपलब्ध कराने से रोक दिया।
नई दिल्ली [भारत]: दिल्ली उच्च न्यायालय ने नौ वेबसाइटों को डिजिटल18 मीडिया प्राइवेट लिमिटेड की फिल्म 'दृश्यम: द कंक्लूजन' को बिना अनुमति के होस्ट करने, स्ट्रीम करने या देखने अथवा डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध कराने से रोक दिया है। न्यायमूर्ति पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने 1 अक्टूबर, 2026 को पारित एक आदेश में कहा कि दलीलों और उनके समक्ष प्रस्तुत सामग्री के प्रथम दृष्टया आकलन के आधार पर डिजिटल18 ने एकतरफा अंतरिम निषेधाज्ञा दिए जाने का मामला बनाया है। न्यायालय ने पाया कि वादी को होने वाली संभावित क्षति की भरपाई मौद्रिक रूप से पर्याप्त नहीं की जा सकती है और सुविधा का संतुलन तथा प्रथम दृष्टया मामला वादी के पक्ष में है।
9 वेबसाइटों और अज्ञात पक्षों के खिलाफ मुकदमा
यह मुकदमा मुख्य रूप से नौ चिन्हित वेबसाइटों और अज्ञात वेबसाइटों या व्यक्तियों के खिलाफ निर्देशित था। इन पर बिना अनुमति के कॉपीराइट सामग्री को ऑनलाइन उपलब्ध कराने में कथित रूप से शामिल होने का आरोप था। डिजिटल18 ने अदालत को बताया कि ये वेबसाइटें पहले भी कथित पायरेसी में शामिल रही हैं, जिसमें उसकी फिल्म 'जॉली एलएलबी 3' की पायरेसी भी शामिल है। कंपनी को आशंका थी कि 2 अक्टूबर को रिलीज होने वाली फिल्म 'दृश्यम: द कंक्लूजन' भी इन वेबसाइटों पर उपलब्ध करा दी जाएगी।
बिना अनुमति स्ट्रीमिंग और डाउनलोड पर रोक
परिणामस्वरूप, अदालत ने नौ आरोपियों और उनकी ओर से कार्य करने वाले व्यक्तियों को अपनी वेबसाइटों या किसी अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिना अनुमति के फिल्म का संचार करने, होस्ट करने, स्ट्रीम करने या देखने अथवा डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध कराने से रोक दिया।
72 घंटे में डोमेन ब्लॉक करने का निर्देश
न्यायालय ने कई प्रतिवादियों और मध्यस्थों को वादी की सूचना और साक्ष्य प्राप्त होने के 72 घंटों के भीतर संबंधित डोमेन नामों को तुरंत निलंबित, ब्लॉक, निष्क्रिय या बंद करने का निर्देश दिया। सरकारी अधिकारियों को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया।
नई पायरेसी साइट मिलने पर कार्रवाई की अनुमति
अदालत ने डिजिटल18 को यह भी अनुमति दी कि यदि उसे बाद में किसी अन्य वेबसाइट या व्यक्ति द्वारा फिल्म की पायरेसी का पता चलता है, जिसे मुकदमे में पक्षकार नहीं बनाया गया है, तो वह डोमेन नाम रजिस्ट्रार, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और संबंधित सरकारी विभाग से संपर्क कर सकती है और आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश मांग सकती है।
(एएनआई)
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