नेपाल में सरकारी फरमान से पूरे देश में बवाल मच गया..केपी सरकार ने सोशल ऐप पर बैन लगाया था..जिसको लेकर जनता में भारी आक्रोश था..वहीं सोमवार को रोष इतना बढ़ गया कि आंदोलन सड़क से सीधा संसद पहुंच गया
नकुल जैन, नोएडा..
नेपाल में सोशल मीडिया पर बैन लगाना सरकार को खुद ही मुसीबत में डालता दिखाई दे रहा है...बता दें कि नेपाल सरकार ने सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म को 17 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन कराने की डेड लाइन दी थी..लेकिन उन्होंने नेपाल सरकार की बात पर गौर नहीं किया..और रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया..जिसके बाद सरकार ने 4 सितंबर को 26 सोशल मीडिया एप पर बैन लगा दिया..वहीं नेपाल में आम लोगों की तरफ से सरकार के फैसले का विरोध होने लगा..साथ ही देश के युवा ने सरकार के फरमान के खिलाफ मोर्चा संभाला..और पूरे नेपाल में भवंडर मचा दिया..जिनमें जेन-ज़ी की तादाद सबसे अधिक बताई जा रही है..हालांकि सरकार ने जनता का विरोध देखते हुए अपने आदेश से यूटर्न ले लिया है..लेकिन उसके बावजूद भी जनआक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है..फिलहाल मौजूदा हालातों को देखते हुए नेपाल में स्थिती बेकाबू नजर आ रही है..जिसके चलते आम आदमी से लेकर शासन और प्रशासन भय के माहौल में नजर आ रहा है..साथ ही ओली सरकार की कुर्सी भी खतरे में नजर आ रही है..
आखिर कैसे हुआ नेपाल में बवाल...
नेपाल प्रधानमंत्री केपी ओली शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म को 17 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन करवाने का अल्टीमेटम दिया था..लेकिन सोशल मीडिया साइट्स की तरफ से इसको लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई..जिसके बाद सरकार ने एक और डेड लाइन जारी करके 4 सितंबर तक समय दिया..हालांकि अबकी बार भी सरकार के आदेश की सोशल ऐप्स की तरफ से अनदेखी की गई..जिसके बाद नेपाल सरकार ने पूरे नेपाल में 26 सोशल ऐप को बैन कर दिया..वहीं सरकार के फरमान के बाद देश भर में इसको लेकर जमकर विरोध होने लगा..वहीं सोमवार को आंदोलन इतना भयावह हो गया कि कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा..
आंदोलन कैसे हुआ आक्रामक
सरकार की तरफ से सोशल एप बैन के बाद पूरे देश में लोगों की तरफ से नाराजगी जाहिर की गई..लोगों ने इसको लेकर तर्क दिया कि नेपाल सरकार अभिव्यक्ति की आजादी दबाने का काम कर रही है..लोगों ने खासतौर पर युवाओं ने जगह जगह विरोध दर्ज करना शुरू किया..वहीं सोमवार को इस जन आंदोलन ने देखते ही देखते उस समय विकराल रुप ले लिया.जब जेन-ज़ी विरोध जताने के लिए संसद की तरफ कूच कर गए..बता दें कि उन्होंने पहले नेपाल की राजधानी काठमांडू में जगह-जगह बैरिकेट्स तोड़े..और फिर उसके बाद जबरन संसद की तरफ कूच किया..वहीं सरकार की तरफ से हालात बिगड़ने पर सेना को आगे किया गया..जिनकी तरफ से पिछले कई घंटों से आंदोलनकारियों को रोकने की कोशिश की जा रही है..हालांकि आंदोलन के लिए एक बड़ी संख्या में युवाओं का सैलाब उतरने के कारण उनसे स्थिती को संभाला नहीं जा रहा है,,जिसके चलते नेपाल के कई हिस्सों में कर्फ्यू लगाया हुआ है..वहीं इस जनआक्रोश के दौरान अब तक 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है,वहीं सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं...
कौन होत हैं GEN-Z
सोशल मीडिया से लगातार जुड़ी रहने वाली युवा और किशोर की ये ऐसी फौज होती है,,जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है..ये लोग सोशल ऐप के जरिए गेमिंग प्रोग्राम,,कंटेंट क्रिएटर्स, इंफ्लुएंर्स और टेक्नॉलजी और स्मार्ट फोन के साथ जुड़े हुए होते हैं.. ये लोग लगातार सोशल मीडिया के साथ जुड़े रहते हैं..मौजूदा समय में इनकी संख्या में भारी इजाफा देखने को मिला है.. इन लोगों में रचनात्मकता और बुद्दिमता का अनोखा संगम देखने को मिलता है..ये लोग अपनी क्रिएटिविटी के लिए देश-दुनिया और अपने इलाकों में मशहूर होत है..ये लोग समाज से जुड़े आंदोलन में भी सोशल मीडिया कनेक्टिविटी के जरिए भाग लेते हैं.और उन्हें प्रभावशाली बनाते हैं..नेपाल में जो आंदोलन चल रहा है उसके लिए भी कहा जा रहा है कि ये आंदोलन अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने के लिए किया जा रहा है.जिसके चलते भी जेन-ज़ी ने फ्रंट पर आकर मोर्चा संभाला है.. आंदोलन मे जेन-ज़ी की भागीदारी मुख्य रुप से होने के कारण इसे जेन-ज़ी रिवॉल्यूशन का नाम भी दिया गया है...क्यों कि नेपाल सरकार के फरमान का असर भी इसी समुदाय पर सबसे ज्यादा पड़ने वाला है..
बैन हटाने के बाद सत्ता पलटने की मांग
नेपाल सरकार ने जनता के भारी विरोध के बाद अपने फैसले को वापिस ले लिया है..और वहीं ओली सरकार की तरफ से सभी 26 ऐप पर से पांबदी हटाने की घोषणा कर दी गई है..हालांकि सरकार की तरफ से ये भी कहा गया है कि, सभी ऐप को धीरे धीरे करके बहाल किया जाएगा..वहीं सरकार के यूटर्न के बावजूद जनता की नाराजगी थमने का नाम नहीं ले रही है..जनता और खासतौर पर जेऩ-ज़ी की तरफ से सत्ता को पलटने की मांग जा रही है.उनका कहना है कि प्रधानमंत्री केपी ओली ने निहत्थों को मौत के घाट उतरवाकर घिनौना अपराध किया है..जिसके लिए उन्हें अपना इस्तीफा देना होगा..बता दें कि कल के आंदोलन में 20 के करीब मौत हुई है..जिनमें सबसे ज्यादा संख्या 18 से 20 आयु वर्ग के आंदोलनकारियों की बताई जा रही है...
फिलहाल सरकार ने सभी पांबदियों को हटाने का आश्वासन दे दिया है..लेकिन कल का नरसंहार का नेपाल में दृश्य़ इतना भयावह था कि वहां के लोकतंत्र पर सवाल उठ रहे हैं.वहीं लोग भी केपी सरकार के एक्शन को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं कि, उन्होंने आंदोलनकारियों के प्रति इतना सख्त रुख अपनाकर क्या साबित करने की कोशिश की है..दूसरा विपक्ष भी सरकार की जमकर खिंचाई कर रहा है..क्यों कि उनके पास जन आंदोलन के बहाने सत्ता में वापसी करने का इससे अच्छे मौका नहीं हो सकता....