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233 वर्ष पुरानी वाल्मीकि रामायण पांडुलिपि

वाल्मीकि रामायण की 233 साल पुरानी पांडुलिपि राम कथा संग्रहालय को भेंट

राम नगरी अयोध्या को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की एक ऐतिहासिक सौगात मिली है। वाल्मीकि रामायण की 233 वर्ष पुरानी दुर्लभ संस्कृत पांडुलिपि को राम कथा म्यूजियम को भेंट किया गया है।

वाल्मीकि रामायण की 233 साल पुरानी पांडुलिपि राम कथा संग्रहालय को भेंट

Valmiki Ramayana |

अयोध्या को मिली ऐतिहासिक सांस्कृतिक सौगात

राम नगरी अयोध्या को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की एक ऐतिहासिक सौगात मिली है। वाल्मीकि रामायण की 233 वर्ष पुरानी दुर्लभ संस्कृत पांडुलिपि को राम कथा म्यूजियम को भेंट किया गया है।  वाल्मीकि रामायण की 233 वर्ष पुरानी संस्कृत की एक दुर्लभ पांडुलिपि अब अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में शोधार्थियों और श्रद्धालुओं के लिए सुलभ होगी। 1792 ई. की इस अमूल्य धरोहर में भगवान श्रीराम का चरित्र चित्रण करते पांच प्रमुख कांड - बालकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड और युद्धकांड शामिल हैं।  केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी ने एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक हस्तांतरण के तहत, तीन मूर्ति स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र को वाल्मीकि रामायण (तत्त्वदीपिका टीका सहित) की 233 वर्ष पुरानी संस्कृत की एक दुर्लभ पांडुलिपि सौंपी।

देवनागरी लिपि में लिखी दुर्लभ कृति

आदि कवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित और महेश्वर तीर्थ की शास्त्रीय टीका से युक्त यह पांडुलिपि संस्कृत (देवनागरी लिपि) में लिखी गई है। यह विक्रम संवत 1849 (1792 ईस्वी) की एक ऐतिहासिक महत्व की कृति है और रामायण की एक दुर्लभ सुरक्षित पाठ परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। इस संग्रह में महाकाव्य के पांच प्रमुख कांड बालकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड और युद्धकांड शामिल हैं, जो इतिहास की कथात्मक और दार्शनिक गहराई को दर्शाते हैं।

यह पांडुलिपि पहले नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन को अस्थायी रूप से सौंपी गई थी। अब इसे अयोध्या, उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय को स्थायी रूप से उपहार में दिया गया है। यह महत्वपूर्ण कदम रामायण विरासत के वैश्विक केंद्र के रूप में संग्रहालय के विकास में मदद करने के उद्देश्य से है, उठाया गया है। इससे आम जनता तक इसकी व्यापक पहुंच के साथ इसका संरक्षण सुनिश्चित होगा।

प्रो. वराखेड़ी ने इस मौके पर कहा, “यह उपहार पवित्र अयोध्या नगरी में वाल्मीकि रामायण के गहन ज्ञान को अमरता प्रदान करेगा, जिससे विद्वानों, भक्तों और दुनिया भर के आगंतुकों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित होगी।” पीएमएमएल की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा, “वाल्मीकि रामायण की इस दुर्लभ पांडुलिपि का अयोध्या स्थित राम कथा संग्रहालय को दान राम भक्तों और अयोध्या स्थित मंदिर परिसर के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।”

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