केन्द्र सरकार ने अमेजन-फ्लिपकार्ट, फेसबुक मेटा, मीशो समेत आठ ई-कॉम0र्स कंपनियों पर ₹44 लाख का जुर्माना लगाया है।
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने अमेजन-फ्लिपकार्ट, फेसबुक मेटा, मीशो समेत आठ ई-कॉम0र्स कंपनियों पर ₹44 लाख का जुर्माना लगाया है। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने ई कामर्स प्लेटफार्म से अवैध वॉकी-टॉकी की बिक्री को लेकर बड़ा एक्शन लिया है। केन्द्रीय एजेंसी ने इस बिक्री को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए यह कार्रवाई की गयी है।
प्लेटफॉर्म्स पर बेचे जा रहे थे अनधिकृत वॉकी-टॉकी
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCP1A) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बिक रहे अनधिकृत वॉकी-टॉकी और पर्सनल मोबाइल रेडियो (PMR) डिवाइसेज की जांच की थी। जांच में सामने आया कि कई प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे वॉकी-टॉकी बेच रहे थे, जो लाइसेंस-फ्री फ्रीक्वेंसी बैंड के बाहर काम करते हैं। कंपनियों के पास जरूरी इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ETA) सर्टिफिकेशन भी नहीं था। इसे न सिर्फ उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 बल्कि टेलीकॉम नियमों का भी उल्लंघन माना गया है।
डिवाइस य सीमा से बाहर की फ्रीक्वेंसी पर कर रहे थे काम
CCPA की ई-कॉमर्स कंपनियों की जांच में पता लगा कि अमेजन-फ्लिपकार्ट, मीशो समेत कई प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे वॉकी-टॉकी बेचे जा रहे थे जिनके पास जरूरी लाइसेंस या तकनीकी मंजूरी नहीं थी। CCPA की जांच में सामने आया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले कई डिवाइस इस तय सीमा से बाहर की फ्रीक्वेंसी पर काम कर रहे थे। साथ ही, इन उपकरणों के पास 'इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल' (ETA) सर्टिफिकेट भी नहीं था, जो किसी भी वायरलेस डिवाइस को भारत में बेचने के लिए अनिवार्य है। कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 और टेलीकॉम कानूनों के उल्लंघन के लिए की गई है।
आठ कंपनियों के खिलाफ अंतिम आदेश जारी, लगा 44 लाख का जुर्माना
CCPA ने इस मामले मेंं कुल आठ कंपनियों के खिलाफ अंतिम आदेश जारी किए और कुल 44 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। Amazon, Flipkart, Meesho और Meta Platforms (Facebook Marketplace) पर 10-10 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोका गया है। वहीं चिमिया, जियोमार्ट, टॉक प्रो और मास्कमैन टॉयज पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक मीशो, मेटा, जियोमार्ट, चिमिया और टॉक प्रो ने जुर्माने की राशि जमा भी कर दी है, जबकि बाकी से भुगतान का इंतजार है।
भारत में वॉकी-टॉकी इस्तेमाल करने पर लागू हैं कड़े नियम
भारत में वॉकी-टॉकी इस्तेमाल करने के कड़े नियम लागू हैं। मौजूदा नियमों के अनुसार, बिना लाइसेंस के केवल वही वॉकी-टॉकी इस्तेमाल किए जा सकते हैं जो 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज (MHz) की फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं। CCPA की जांच में खुलासा हुआ कि कुछ प्लेटफॉर्म्स पर हजारों ऐसे प्रोडक्ट लिस्ट थे, जिनमें फ्रीक्वेंसी रेंज या लाइसेंस से जुड़ी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। कई विक्रेताओं ने इन्हें 100% लीगल और लाइसेंस-फ्री बताकर भ्रामक विज्ञापन भी किए।
फ्लिपकार्ट से बिके 65,931 वॉकी-टॉकी
CCPA से मिली जानकारी के अनुसार फ्लिपकार्ट के प्लेटफॉर्म्स से 65,931 वॉकी-टॉकी की बिक्री गईं जिनमें फ्रीक्वेंसी की जानकारी जगह या तो खाली थी या वह तय सीमा से बाहर थी। इसी प्रकार अमेजन के प्लेटफॉर्म से जनवरी 2023 से मई 2025 के बीच 2,602 यूनिट्स बेची गईं। कई प्रोडक्ट लिस्टिंग में जरूरी सर्टिफिकेशन की जानकारी नहीं थी। CCPA ने बताया कि फेसबुक मार्केटप्लेस से लाइसेंस और फ्रीक्वेंसी की जानकारी के बिना वॉकी-टॉकी लिस्ट किए गए थे। दखल के बाद 710 लिस्टिंग्स को हटाया गया। मीशो के प्लेटफॉर्म से एक ही सेलर ने 2,209 यूनिट्स बेचीं, जिनमें नियमों का पालन नहीं किया गया था।
कंपनियों ने खुद को बताया बिचौलिया
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) के समक्ष सुनवाई के दौरान ई-कॉमर्स कंपनियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी भूमिका इस बिक्री में सिर्फ एक 'बिचौलिया' की है। प्लेटफार्म पर थर्ड-पार्टी सेलर जो सामान बेच रहे हैं, उसके लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं। लेकिन सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने ई कामर्स कंपनियों की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।
प्लेटफॉर्म पर अवैध सामान की लिस्टिंग नहीं रोकने का आरोप
CCPA ने कहा कि जो प्लेटफॉर्म उत्पादों की लिस्टिंग, होस्टिंग और प्रमोशन कर रहे हैं, वे अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। कंपनियों को अपनी तकनीक का इस्तेमाल कर अवैध सामान की लिस्टिंग को रोकना चाहिए। CCPA ने ई-कॉमर्स कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए 'रेडियो उपकरणों की अवैध लिस्टिंग और बिक्री की रोकथाम' के लिए नई गाइडलाइंस-2025 अधिसूचित की हैं। इसे दूरसंचार विभाग (DoT) और गृह मंत्रालय के साथ सलाह के बाद तैयार किया गया है।
प्रॉडक्ट की भ्रामक विज्ञापनों पर लगाना होगा रोक
अब कंपनियों के लिए प्रॉडक्ट की लिस्टिंग से पहले फ्रीक्वेंसी और ETA सर्टिफिकेट की जांच, लाइसेंस की जरूरतों के बारे में ग्राहकों को पूरी जानकारी देना होगा और प्रॉडक्ट की बिक्री के लिए भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाना होगा। साथ ही इस प्रकार के अवैध उपकरणों को प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए कंपनियों के लिए ऑटोमैटिक सिस्टम बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
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