भारत में रोजगार के मोर्चे पर दुश्वारियों की चिंता के बीच तकनीकी क्षेत्र (Tech Sector) में यह साल युवाओं को नौकरी के बेहतर मौके मुहैया करा सकता है।
नई दिल्ली। भारत में रोजगार के मोर्चे पर दुश्वारियों की चिंता के बीच तकनीकी क्षेत्र (Tech Sector) में यह साल युवाओं को नौकरी के बेहतर मौके मुहैया करा सकता है। एक आकलन के मुताबिक तकनीकी क्षेत्र की नौकरियों (टेक जॅब्स) में वर्ष 2026 में 12 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इस दौरान करीब 1.25 लाख नई तकनीकी नौकरियां पैदा होने की संभावना है। इन नौकरियों में परमानेंट, टेम्परेरी और कॉन्ट्रेक्चुअल आधारित नौकरियां शामिल होंगी। यह आकलन वर्क सॉल्यूशन प्रोवाइडर ‘एडेको इंडिया’ की ताजा रिपोर्ट में किया गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ये एक सकारात्मक संकेत है।
वर्ष 2025 में 44 प्रतिशत तक पहुंची तकनीकी प्रतिभा की कमी
वर्क सॉल्यूशन प्रोवाइडर "एडेको इंडिया" की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 में तकनीकी प्रतिभा की कमी 44 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसके चलते कंपनियों को अच्छे कर्मचारियों के लिए ज्यादा वेतन देना पड़ा और औसत वेतन 2024 की तुलना में 18 प्रतिशत बढ़ गया। स्पेशलिस्ट कर्मचारियों के वेतन में भी औसतन 15 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है। इससे कंपनियों के बीच अच्छे कर्मचारियों को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है।
अच्छे कर्मचारियों के लिए कंपनियों ने की वेतन में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी
वर्ष 2025 में तकनीकी क्षेत्र ने ‘टैलेंट वॉर’ का सामना किया, जहां कुशल कर्मचारियों की कमी 44 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसका सीधा असर वेतन संरचना पर पड़ा है। अच्छे कर्मचारियों को अपने साथ जोड़े रखने के लिए कंपनियों ने औसत वेतन में 18 प्रतिशत (2024 की तुलना में) की बढ़ोतरी की है। विशेष रूप से मशीन लर्निंग इंजीनियर्स, डेटा इंजीनियर्स और फुल-स्टैक डेवलपर्स जैसे पदों के लिए कंपनियां किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। स्पेशलिस्ट कर्मचारियों के वेतन में भी औसतन 15 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है, जो इस क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि अर्टिफिशियल एंटेलिजेंस (एआई), डेटा और सइबर सेक्योरिटी से जुड़ी नौकरियों की मांग 51 प्रतिष्ठत बढ़ गई है। पहले इन क्षेत्रों को प्रयोग के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब ये कंपनियों की महत्वपूर्ण जरूरत बन चुके हैं।
जीसीसी में 20 प्रतिशत बढ़ी भर्तियों की दर
रिपोर्ट के अनुसार, जीसीसी में भर्तियों की दर 20 प्रतिशत बढ़ी है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर है. इसके अलावा, कैंपस प्लेसमेंट में भी 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस नई भर्ती प्रक्रिया में डीप-टेक, फिनटेक, हेल्थ-टेक और सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) पर आधारित स्टार्टअप्स सबसे आगे रहे हैं। हालांकि निवेश के मोर्चे पर सावधानी बरती जा रही है, लेकिन एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर स्पष्ट रणनीति रखने वाली कंपनियां अपनी डेटा टीमों का विस्तार करने से पीछे नहीं हट रही हैं।
भारत में बढ़ रहा डिजिटल सुरक्षा और डेटा नियमों के प्रति जागरूकता
एडेको इंडिया के निदेशक संकेत चेंगप्पा के अनुसार, अब तकनीक केवल आईटी कंपनियों तक सीमित नहीं रह गई है। बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवा (Healthcare), निर्माण और परिवहन जैसे पारंपरिक क्षेत्र भी अब डिजिटल और एआई आधारित कामकाज को अपना रहे हैं। कुल तकनीकी भर्तियों में इन गैर-तकनीकी क्षेत्रों की हिस्सेदारी लगभग 38 प्रतिशत है। विमानन (Aviation), ऊर्जा और रिटेल क्षेत्र की कंपनियों ने भी अपनी तकनीकी टीमों में 30 प्रतिशत का इजाफा किया है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत में डिजिटल सुरक्षा और डेटा नियमों के प्रति जागरूकता और अनुपालन तेजी से बढ़ रहा है।
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