Ram Mandir : पीएम मोदी ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की चेतना स्थली बन रहा है. यहां सप्तस्थली बने हैं.
Ram Mandir : पीएम मोदी ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की चेतना स्थली बन रहा है. यहां सप्तस्थली बने हैं. निषाद राज, मां सबरी का मंदिर है. यहां एक ही स्थान पर महर्षि वशिष्ठ, माता अहल्या, महर्षि अगस्त्य, संत तुलसीदास, महर्षि विश्वामित्र हैं. पीएम मोदी और मोहन भागवत ने राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहराया.
उन्होंने कहा कि यहां जटायू जी और गिलहरी की मूर्तियां भी हैं, जो बड़े संकल्पों के लिए छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दिखाती हैं. यहां एक ही स्थान पर माता अहिल्या है, महर्षि वाल्मीकि हैं, महर्षि वशिष्ठ हैं, महर्षि विश्वामित्र हैं, महर्षि अगस्त्य हैं और संत तुलसीदास हैं. रामलला के साथ-साथ इन सभी ऋषियों के दर्शन भी यहीं पर होते हैं. यहां जटायु जी और गिलहरी की मूर्तियां भी हैं, जो बड़े संकल्पों की सिद्धि के लिए हर छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दिखाती हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि मैं हर देशवासी से कहूंगा कि जब आप राम मंदिर के दर्शन करें तो सप्त मंदिर के दर्शन भी करें. ये मंदिर आस्था के साथ-साथ मित्रता, सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को भी शक्ति देते हैं. हम सब जानते हैं कि राम भेद से नहीं भाव से जुड़ते हैं.
उन्होंने कहा कि हम ऐसा समाज बनाएं, जहां गरीबी न हो, कोई दुखी या लाचार न हो, जो लोग किसी कारण से मंदिर नहीं आ पाते और दूर से मंदिर के ध्वज को प्रणाम कर लेते हैं, उन्हें भी उतना ही पुण्य मिल जाता है. ये धर्म ध्वज भी इस मंदिर के ध्येय का प्रतीक है. ये ध्वज दूर से ही रामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराएगा. युगों - युगों तक श्री राम के आदेशों और प्रेरणाओं को मानव मात्र तक पहुंचाएगा. संपूर्ण विश्व के करोड़ों राम भक्तों को इस अद्वितीय अवसर की शुभकामनाएं देता हूं.

श्रीराम अयोध्या से वनवास को गए तो वे युवराज राम थे
पीएम मोदी ने कहा कि हर उस दानवीर का भी आभार जिसने राम मंदिर निर्माण के लिए अपना सहयोग दिया. हर श्रमवीर, योजनाकार, वास्तुकार का अभिनंदन, जब श्रीराम अयोध्या से वनवास को गए तो वे युवराज राम थे, जब लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर लौटे. विकसित भारत बनाने के लिए भी समाज को सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है.
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में महिला, दलित, पिछड़े, अति-पिछड़े, आदिवासी, वंचित, किसान, श्रमिक, युवा हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा गया है. जब देश का हर व्यक्ति, हर वर्ग, हर क्षेत्र सशक्त होगा, तब संकल्प की सिद्धि में सबका प्रयास लगेगा और सबके प्रयास से ही 2047 में जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा, तब तक हमें विकसित भारत का निर्माण करना ही होगा.
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