दिल्ली हाईकोर्ट में AICTE का बड़ा खुलासा! फर्जी और अनधिकृत तकनीकी संस्थानों पर नकेल कसने के लिए तैयार हुआ सख्त रेगुलेटरी ढांचा। अब बिना मान्यता वाले कॉलेजों पर होगी कड़ी कार्रवाई।
नई दिल्ली। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि उसने देश भर में फर्जी और अनधिकृत तकनीकी संस्थानों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए एक व्यापक कानूनी और रेगुलेटरी ढांचा तैयार किया है। कोर्ट में दाखिल एक जवाबी हलफनामे में, AICTE ने कहा कि वह अनुमोदित और गैर-अनुमोदित संस्थानों की सूची नियमित रूप से प्रकाशित करता है, एडमिशन सेशन से पहले सार्वजनिक सलाह जारी करता है और बिना मंज़ूरी के चल रहे संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करता है।
PIL और AICTE की संवैधानिक स्थिति
यह हलफनामा वकील शशांक देव सुधी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के जवाब में दाखिल किया गया है और AICTE की डायरेक्टर डॉ. नीतू भगत ने इस पर शपथ ली है। AICTE ने बताया कि वह AICTE एक्ट, 1987 के तहत गठित एक कानूनी संस्था है, जिसका काम टेक्निकल शिक्षा का नियोजित और समन्वित विकास सुनिश्चित करना और पूरे देश में शैक्षणिक मानकों को बनाए रखना है। इसमें कहा गया है कि AICTE एक्ट काउंसिल को टेक्निकल शिक्षा को रेगुलेट करने और संस्थानों व टेक्निकल प्रोग्राम्स की मंज़ूरी से जुड़े नियम बनाने का अधिकार देता है।
विस्तृत मंजूरी प्रक्रिया नियम
AICTE के अनुसार, उसने नए तकनीकी संस्थानों की स्थापना, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और मौजूदा संस्थानों में प्रवेश बढ़ाने के लिए प्रक्रिया और न्यूनतम आवश्यकताओं को निर्धारित करते हुए विस्तृत मंजूरी प्रक्रिया नियम (Approval Process Regulations) और मंजूरी प्रक्रिया हैंडबुक तैयार की है। इसने आगे कहा कि ये नियम टेक्निकल शिक्षण संस्थानों पर इसकी निगरानी का आधार हैं।
सार्वजनिक सूची और एडवाइजरी जारी करना
काउंसिल ने कोर्ट को बताया कि वह अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अनुमोदित और गैर-अनुमोदित संस्थानों की सूची बनाए रखती है और समय-समय पर अपडेट करती है, ताकि छात्र, माता-पिता और आम जनता एडमिशन लेने से पहले कॉलेजों की अनुमोदन स्थिति की जांच कर सकें। यह सार्वजनिक नोटिस भी जारी करता है। खासकर एडमिशन और काउंसलिंग सेशन से पहले, जिसमें संबंधित लोगों को संस्थानों और प्रोग्राम्स की अनुमोदन की स्थिति की जांच करने और गैर-अनुमोदित संस्थानों की सूची को क्रॉस-चेक करने की सलाह दी जाती है।
दंडात्मक कार्रवाई और राज्य सरकारों की भूमिका
AICTE ने आगे बताया कि उसने AICTE एक्ट, अनुमोदन प्रक्रिया हैंडबुक और अन्य लागू नियमों के तहत एक व्यापक रेगुलेटरी ढांचा स्थापित किया है, और जब भी संस्थान काउंसिल की मंज़ूरी के बिना टेक्निकल प्रोग्राम चलाते हुए पाए जाते हैं, तो वह कार्रवाई करता है। AICTE ने यह भी कहा कि जो संस्थान गैर-मान्यता प्राप्त स्थानों से चल रहे हैं, उन्हें बंद किया जा सकता है और उन पर दूसरी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, संबंधित राज्य सरकारों या केंद्र शासित प्रदेशों से कहा जा सकता है कि वे नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों या उनके मैनेजमेंट के खिलाफ उचित सिविल या आपराधिक कार्रवाई शुरू करें।
सभी प्रोग्राम्स के लिए अनिवार्य मंजूरी
AICTE ने आगे कहा कि संस्थानों को अपने कुछ ही प्रोग्राम के लिए मंजूरी लेने की अनुमति नहीं है। AICTE के अधिकार क्षेत्र में आने वाले प्रोग्राम चलाने वाले किसी भी संस्थान को ऐसे सभी प्रोग्राम के लिए मंजूरी लेनी होगी। ऐसा न करने पर लागू नियमों के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। AICTE ने कोर्ट के निर्देश पर और ज़्यादा विस्तृत जवाबी हलफनामा (counter affidavit) दाखिल करने की अनुमति भी मांगी है।
दिल्ली हाईकोर्ट की गंभीर चिंता
यह जवाबी हलफनामा हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद दाखिल किया गया है। कोर्ट देश भर में चल रहे फर्जी विश्वविद्यालयों और बिना मान्यता वाले उच्च शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली वकील शशांक देव सुधी की PIL पर सुनवाई कर रहा था। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने इस मुद्दे को गंभीर चिंता का विषय बताया। बेंच ने कहा कि कई छात्र, खासकर छोटे शहरों से, ऐसे संस्थानों में दाखिला लेते हैं, लेकिन बाद में उन्हें पता चलता है कि नौकरी पाने में उनकी डिग्री की कोई खास अहमियत नहीं है।
केंद्र और एजेंसियों को निर्देश
बेंच ने केंद्र सरकार, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) और AICTE को निर्देश दिया था कि वे फर्जी संस्थानों के प्रसार को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए हलफनामे दाखिल करें। कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से यह भी कहा था कि वे PIL में उठाए गए मुद्दों को शिक्षा मंत्रालय तक पहुंचाएं और सुनिश्चित करें कि उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही, कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे फर्जी विश्वविद्यालयों की जांच के लिए बनाई गई समिति द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी रिकॉर्ड पर रखे।
फर्जी विश्वविद्यालयों पर CBI जांच और कार्रवाई की मांग
सुनवाई के दौरान, ASG चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि स्थिति चिंताजनक है। कुछ फर्जी विश्वविद्यालय तो वोकेशनल स्टडीज, लॉ और मेडिसिन में भी कोर्स ऑफर कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि फर्जी विश्वविद्यालयों के बारे में जानकारी पहले से ही पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है। अपनी PIL में, सुधि ने दिल्ली और देश के बाकी हिस्सों में चल रही फर्जी यूनिवर्सिटीज और बिना मान्यता वाले संस्थानों को बंद करने के लिए निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने फर्जी यूनिवर्सिटीज के तौर पर पहचाने गए संस्थानों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और उन्हें शुरू करने और चलाने के लिए जिम्मेदार लोगों की CBI से जांच कराने की भी मांग की है।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ें: दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक राजू कुमार सिंह की सजा निलंबित की, जश्न में फायरिंग से मौत का मामला