डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण बच्चों के फेफड़ों के विकास और सीखने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण के लिए GRAP का पहला चरण लागू किया गया है।
Air Pollution Hampers Children's Lung Development and Learning Ability: Soumya Swaminathan |
चेन्नई (तमिलनाडु)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने उत्तर भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रदूषण का बढ़ता स्तर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है, खासकर शिशुओं और बच्चों के लिए। ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि बच्चों के फेफड़े, मस्तिष्क, हृदय और रक्त वाहिकाएं अभी विकसित हो रही होती हैं, इसलिए वे प्रदूषित हवा के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। उनके अनुसार, वायु प्रदूषण बच्चों के शारीरिक विकास और सीखने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है।
बच्चों के फेफड़ों और सीखने की क्षमता पर असर
डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, "पूरे उत्तर भारत में प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक स्थिति तक पहुंच रहा है, जो हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। शिशु और बच्चे इसके प्रति अधिक संवेदनशील हैं, क्योंकि उनके फेफड़े, मस्तिष्क, हृदय और रक्त वाहिकाएं अभी भी विकसित हो रही हैं। वायु प्रदूषण उनके फेफड़ों के विकास को रोक रहा है और उनकी सीखने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है।" उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रदूषित हवा के प्रभाव को गंभीर चिंता का विषय बताया।
PM प्रदूषण के संपर्क को लेकर स्वामीनाथन की चेतावनी
पार्टिकुलेट मैटर (PM) के संपर्क में आने के प्रभावों पर जोर देते हुए डॉ. स्वामीनाथन ने इसकी गंभीरता समझाने के लिए सिगरेट से तुलना की। उन्होंने कहा, "24 घंटों के दौरान 22 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की दर से PM (पार्टिकुलेट मैटर) में सांस लेना, एक सिगरेट पीने के बराबर माना जाता है।" उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई है।
दिल्ली में AQI 299, कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर ऊंचा
गुरुवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में बनी रही। सरकारी AQI डैशबोर्ड के अनुसार, सुबह 10:31 बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 299 दर्ज किया गया। वहीं, निजी निगरानी प्लेटफॉर्म IQAir ने सुबह 9:30 बजे AQI 242 दर्ज किया। राष्ट्रीय राजधानी के कई इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर ऊंचा रहा। पटपड़गंज में AQI 298, ITO में 280, डिफेंस कॉलोनी में 261, आनंद विहार और अक्षरधाम में 237-237, रोहिणी में 226, शाहदरा में 225 और देवली में 203 दर्ज किया गया।
दिल्ली-NCR में GRAP का पहला चरण लागू
वायु गुणवत्ता में गिरावट के मद्देनजर कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली-NCR में तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, दिल्ली का औसत दैनिक AQI 20 अक्टूबर को 179 था, जो 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे बढ़कर 244 हो गया। वायु गुणवत्ता में इस गिरावट के बाद अधिकारियों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण उपायों के पहले चरण को लागू करने का फैसला लिया।
मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर लिया गया फैसला
CAQM के अनुसार, GRAP का पहला चरण लागू करने का निर्णय वायु गुणवत्ता की समीक्षा और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) तथा भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमानों के आधार पर लिया गया। इन पूर्वानुमानों में संकेत दिया गया कि आने वाले दिनों में दिल्ली का AQI 'खराब' श्रेणी में बना रह सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू किया गया है।
AQI की श्रेणियां: कितना प्रदूषण माना जाता है खराब?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के वर्गीकरण के अनुसार, AQI की अलग-अलग रीडिंग के आधार पर वायु गुणवत्ता की श्रेणी निर्धारित की जाती है। 201 से 300 के बीच का AQI 'खराब' श्रेणी में आता है, जबकि 301 से 400 के बीच की रीडिंग को 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा जाता है। दिल्ली में दर्ज किए गए AQI के आंकड़े खराब वायु गुणवत्ता की स्थिति दर्शाते हैं। इस बीच, बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रदूषण के प्रभाव को लेकर डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने गंभीर चिंता जताई है। (Source: ANI)
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