जोधपुर खंडपीठ ने आसाराम बापू को गैंगरेप के आरोप से बरी कर दिया, लेकिन अन्य आरोपों में दोषसिद्धि और सजा यथावत रखी।
जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम को बड़ी राहत देने से इनकार करते हुए उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। जोधपुर खंडपीठ ने आसाराम बापू को गैंगरेप के आरोप से बरी कर दिया, लेकिन अन्य आरोपों में दोषसिद्धि और सजा यथावत रखी। अदालत ने अंतरिम जमानत पर चल रहे आसाराम को सरेंडर करने के भी आदेश दिए हैं। वहीं, सह-अभियुक्त संचिता और शरद को सजा में आंशिक राहत देते हुए अदालत ने दोनों अभियुक्तों को बरी कर दिया।
शिल्पी और शरत बरी
आसाराम मामले में पीड़िता के वकील पीसी सोलंकी ने कहा- "लंबी सुनवाई के बाद, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में संचिता और शरद को बरी कर दिया है। आसाराम की धारा 376D, 120B और 134 के तहत सजा को रद्द कर दिया गया है। हालांकि, कोर्ट के बाकी फैसलों को बरकरार रखा है। अब उन्हें अपनी बाकी सजा काटने के लिए सरेंडर करना होगा, जैसा कि हाईकोर्ट ने तुरंत प्रभाव से निर्देश दिया है।"
उम्रकैद की सजा में बदलाव नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की बेंच ने आसाराम समेत तीन अभियुक्तों की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।
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अभी पैरोल पर बाहर हैं आसाराम बापू
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को श्वास संबंधी बीमारी के इलाज के लिए पैरोल मिला था। पैरोल मिलने पर आसाराम जोधपुर जेल से इंदौर आ गया था। इसके बाद सुरक्षा के बीच खंडवा रोड स्थित आश्रम ले जाया गया। गौरतलब है कि 86 वर्षीय आसाराम वर्ष 2013 से ही जोधपुर जेल में बंद है।
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