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आटोमोबाइल कंपनियां जनवरी में बढ़ा सकती है...

आटोमोबाइल कंपनियां जनवरी में बढ़ा सकती हैं गाड़ियों की कीमतें

आटोमोबाइल कंपनियां नये साल पर गाड़ियों की कीमतें बढ़ा सकती हैं। देश में वाहन निर्माता अमूमन हर साल जनवरी में कीमतें बढ़ाते है।

आटोमोबाइल कंपनियां जनवरी में बढ़ा सकती हैं गाड़ियों की कीमतें

Automobile companies may increase vehicle prices in January |

नई दिल्ली। आटोमोबाइल कंपनियां नये साल पर गाड़ियों की कीमतें बढ़ा सकती हैं। देश में वाहन निर्माता अमूमन हर साल जनवरी में कीमतें बढ़ाते है। लेकिन इस बार परिस्थितियां हर साल जनवरी में आमतौर पर होने वाली 1-3% की वृद्धि की तुलना में कहीं अधिक जटिल हैं।

कमजोर रुपया और कमोडिटी लागत में वृद्धि का दबाव

कार निर्माता डॉलर और यूरो के मुकाबले कमजोर होते रुपए, बढ़ती कमोडिटी की कीमतों के कारण विदेशी मुद्रा के दबाव का सामना कर रहे हैं। रुपए की कमजोरी ने आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, सेंसर, ईवी उपकरण और अन्य धातुओं पर निर्भर कार निर्माताओं की लागत में वृद्धि हुई है। तांबा, एल्युमीनियम, लोहा, टाइटेनियम, निकेल और कांच की कीमतों में काफ़ी इजाफा हुआ है। साथ ही ग्रामीण मांग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

टाटा मोटर्स और महिंद्रा ने दिए मूल्य वृद्धि के संकेत

वाहन बनाने वाली देश की दो सबसे बड़ी कंपनियों- टाटा मोटर्स और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने आगामी मूल्य वृद्धि के संकेत दिए हैं। कंपनी ने मीडिया के साथ बातचीत में इनपुट एवं कमोडिटी लागत में हो रही लगातार वृद्धि पर चिंता जताते हुए मूल्य वृद्धि को उद्योग के लिए आवश्यक बताया है।

कमोडिटी लागत में वृद्धि के बावजूद टाटा मोटर्स ने 9 महीनों से नहीं बढ़ाई कीमतें

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के एमडी एवं सीईओ शैलेश चंद्रा ने कहा कि, "कमोडिटी लागत में वृद्धि के बावजूद कंपनी ने 9 महीनों से कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। जनवरी में यानी चौथी तिमाही में हम कीमतें बढ़ाएंगे जैसा आम तौर पर करते रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'हमें इसे आगे बढ़ाना होगा।

बढ़ती कमोडिटी कीमतों के कारण अपनाई जा रही हेजिंग की रणनीति

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के नेतृत्व ने भी इसी तरह की चिंता जाहिर की है। कंपनी की यूटिलिटी वेहिकिल (यूवी), हल्के कमर्शियल वाहन (एलसीवी) और ट्रैक्टर श्रेणियों में जबरदस्त मांग का रुझान बरकरार है। मगर बढ़ती कमोडिटी कीमतें, विशेष रूप से कीमती धातुओं के दाम बढ़ने से जोखिम बढ़ गया है। महिंद्रा एंड महिंद्रा के ईडी एवं सीईओ (वाहन एवं फार्म सेक्टर) राजेश जेजुरिकर ने विश्लेषकों से बातचीत में कहा कि कंपनी हेज पोजीशन लेना जारी रखे हुए है। एमएंडएम समूह के सीएफओ अमरज्योति बरुआ ने कहा कि इस साल कुछ कीमती धातुओं में 60 से 80 फीसदी की वृद्धि हुई है। मगर शुरुआत में ही एमएंडएम के हेजिंग की वजह से तात्कालिक प्रभाव कम रहा है। अगर यह रुझान जारी रहता है तो हेजिंग लागत बढ़ जाएगी और उसका एक असर होगा।

होंडा कार्स इंडिया भी जनवारी से कारों के दाम बढ़ाने पर कर रही विचार

एक अन्य वाहन निर्माता "होंडा कार्स इंडिया" ने भी मूल्य वृद्धि की पुष्टि कर दी है। कंपनी ने कहा कि वह जनवरी से कारों के दाम बढ़ाने पर विचार कर रही है। जनवरी में होने वाली वृद्धि आम तौर पर मॉडल के आधार पर 2 से 4 फीसदी के दायरे में होती है। जनवरी 2025 में कई कंपनियों ने अपने वाहनों के दाम 3 से 4 फीसदी के बीच बढ़ाए थे।

जनवरी में मूल्य वृद्धि एक परंपरा: अनुराग सिंह

प्राइमस पार्टनर्स के सलाहकार अनुराग सिंह ने कहा कि जनवरी की यह मूल्य वृद्धि एक परंपरा है। वाहन निर्माण में उपयोग किये जाने वाले कल पुर्जों के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (ओईएम) आम तौर पर बढ़ती इनपुट लागत की भरपाई के लिए साल के आखिर में कीमत बढ़ाने की घोषणा करते हैं। मगर इस बार अधिकतर कंपनियों ने जीएसटी सुधार के दौरान जारी सरकारी सलाह के कारण इसे टाल दिया था।

जीएसटी कटौती के कारण कीमतों नहीं हुई थी वृद्धि

अनुराग सिंह ने कहा, 'जनवरी में कारों की कीमतें बढ़ाना अब एक सामान्य बात हो गई है।' उन्होंने कहा कि कंपनियों के पास पहले बहुत कम गुंजाइश थी। उन्होंने कहा, 'सरकार ने जीएसटी कटौती के समय कीमतों में वृद्धि न करने के लिए कहा था। इसलिए अधिकतर ओईएम ने उसका पालन किया और रुपये में नरमी एवं इनपुट लागत बढ़ने के बावजूत कीमतों में इजाफा करने से परहेज किया।'

रुपये में गिरावट के कारण वाहनों की कीमतें बढ़ाना आवश्यक

मालूम हो कि नवंबर में केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी दरों में कटौती के बाद कई कार विनिर्माताओं को कीमतों में भारी कमी करनी पड़ी थी। इससे मांग बढ़ी और साल के आखिर में खरीदारी करने के सामान्य व्यवहार में बदलाव आया। पर मांग में वृद्धि के बावजूद रुपये में गिरावट के कारण वाहनों की कीमतें बढ़ाना आवश्यक हो गया है।

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