नई दिल्ली। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रयोग को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है।
नई दिल्ली। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रयोग को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। फर्म ने एक रिपोर्ट में कहा है कि यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो देश की आर्थिक विकास की रफ्तार पर निगेटिव इंपैक्ट पड़ सकता है।
पीएम मोदी को लिखा ओपन लेटर
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म "बर्नस्टीन" (Bernstein) ने Narendra Modi को लिखे एक ओपन लेटर में भारत की आर्थिक दिशा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। फर्म ने भारत में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के बढ़ते प्रयोग और इसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर चिंता जताई है। फर्म का कहना है कि अगर समय रहते ठोस और निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो देश की तेज आर्थिक रफ्तार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
फ्री स्कीम्स पर भी सवाल
फर्म ने पीएम मोदी के बहुप्रचारित "फ्री के राशन" और "मुफ्त की रेवड़ी" पर भी टिप्पणी की है। "बर्नस्टीन" ने कहा कि बढ़ती कैश ट्रांसफर स्कीम्स पर भी चिंता जताई है, जिन पर सालाना 1.7 से 2.5 ट्रिलियन रुपए खर्च हो रहे हैं। इनके कारण इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए रिसोर्सेज कम हो सकते हैं।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस की सलाह
बर्नस्टीन ने अपनी रिपोर्ट में एआई से संबंधित प्रमुख चिंताओं को जाहिर करते हुए कहा है कि भारत एआई की बुनियादी तकनीक (Foundation Models) विकसित करने के बजाय केवल डेटा सेंटर स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। फर्म ने आगाह किया है कि अगर भारतीय डेटा का इस्तेमाल वैश्विक मॉडलों को प्रशिक्षित करने के लिए होता रहा और स्थानीय क्षमता नहीं बनी, तो भारत एआई अर्थव्यवस्था में केवल एक "स्थायी उपभोक्ता" (Consumer) बनकर रह जाएगा। लेटर में कहा गया है कि भारत को अपने घरेलू AI मॉडल और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही देश का R&D खर्च GDP का सिर्फ 0.6-0.7% है, जो ग्लोबल लेवल से काफी कम है। इसे बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया।
अमेरिका-चीन में केंद्रित AI ताकत
बर्नस्टीन का मानना है कि एआई का अधिकांश मूल्य सृजन अमेरिका और चीन में केंद्रित है। भारत को एआई के लाभों को समान रूप से हासिल करने के लिए अपनी घरेलू क्षमता विकसित करने की आवश्यकता है। बर्नस्टीन के पत्र में रोजगार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बढ़ती सब्सिडी और कृषि क्षेत्र की कमजोरियों को प्रमुख मुद्दों के तौर पर उठाया गया है।
नौकरियों पर मंडरा रहा खतरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई के कारण भारत के सेवा क्षेत्र (IT Services and BPO) में बड़े पैमाने पर नौकरियों के जाने का जोखिम है। 10-15 मिलियन लोगों की यह वर्कफोर्स एआई के कारण ऑटोमेशन की चपेट में आ सकती है। जनरेटिव एआई के बढ़ते इस्तेमाल से आईटी और बीपीओ सेक्टर की कई नौकरियां ऑटोमेशन के दायरे में आ सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर भारत ने समय रहते निवेश नहीं बढ़ाया तो वह एआई इकोनॉमी में केवल उपभोक्ता बनकर रह सकता है, जबकि असली फायदा अन्य देशों को मिलेगा।
संरचनात्मक सुधारों की जरूरत
बर्नस्टीन ने रिपोर्ट में भारत में संरचनात्मक सुधारों (Structural Reforms) पर जोर दिया है, जिसमें नवाचार (Innovation), विनिर्माण (Manufacturing) और रोजगार क्षेत्र में तेजी लाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में माना गया है कि भारत ने हाल के वर्षों में प्रोडक्शन और कैपिटल एक्सपेंडिचर पर ध्यान देकर मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता और कॉर्पोरेट कमाई को मजबूती दी है। लेकिन तेजी से बदलती वैश्विक सप्लाई चेन और तकनीक के दौर में इसी गति को बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
ऊर्जा और कृषि पर सुझाव
फर्म ने कहा है कि भारत के पास पूंजी और प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन सही दिशा में निर्णायक कार्रवाई (Decisive Action) की आवश्यकता है। भारत की करीब 88% कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी होती है। इसे देखते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों पर निर्भरता कम करने की सिफारिश की गई है।
चीन का उदाहरण और सबक
रिपोर्ट में कहा गया है कि 'चीन' व्यापक रणनीति के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर उम्मीद के मुताबिक रोजगार नहीं पैदा कर पाया है। वहां भी कृषि क्षेत्र में 42-45% आबादी काम करती है, लेकिन GDP में योगदान सिर्फ 15–16% है। ऐसे में भारत में भी कृषि के सेक्टर पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। फर्म ने कहा कि बार-बार सब्सिडी और तात्कालिक उपायों की बजाय लॉन्ग-टर्म सुधार जरूरी हैं।
अंत में दी चेतावनी
बर्नस्टीन ने अपने पत्र के अंत में कहा कि भारत के पास कैपिटल और टैलेंट मौजूद है, लेकिन अब कठिन और निर्णायक सुधारों की जरूरत है। फर्म ने चेतावनी दी कि देरी से ग्रोथ धीमी हो सकती है।
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