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बजट 2026 में 16वें वित्त आयोग

बजट 2026 में शामिल होंगी 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें

संसद में पेश होने वाले बजट 2026 में 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट को शामिल किया जाएगा। वित्त आयोग अपनी रिपोर्ट पहले ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सौंप चुका है।

बजट 2026 में शामिल होंगी 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें

16th Finance Commission |

क्या होता है वित्त आयोग

संसद में पेश होने वाले बजट 2026 में 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट को शामिल किया जाएगा। वित्त आयोग अपनी रिपोर्ट पहले ही राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु को सौंप चुका है। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट पेश करेंगी। वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर सुझाव देता है और समय-समय पर गठित किया जाता है। यह पांच साल के लिए केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स बंटवारे का एक फार्मूला प्रदान करता है। संविधान के तहत गठित वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे का सूत्र देता है। केंद्र द्वारा लगाए गए उपकर और अधिभार विभाज्य निधि का हिस्सा नहीं हैं। 

16वें वित्त आयोग का गठन और नेतृत्व

नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया की अगुआई में 16वां वित्त आयोग 31 दिसंबर, 2023 को बनाया गया था। हालांकि, 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई हैं। अरविन्द पनगढ़िया के नेतृत्व में वित्त आयोग के सदस्यों - सेवानिवृत्त नौकरशाह एनी जॉर्ज मैथ्यू, अर्थशास्त्री मनोज पांडा, एसबीआई ग्रुप के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्या कांति घोष और आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर और आयोग के सचिव ऋत्विक पांडे हैं। आयोग ने 17 नवंबर 2025 को मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी रिपोर्ट की एक कॉपी सौंपी। केंद्र सरकार हमेशा आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करती रही है। संबंधित शर्तों (टीओआर) के अनुसार, 16वें आयोग को 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच साल की अवधि को शामिल करते हुए अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया था। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच करों की शुद्ध आय के वितरण के साथ-साथ राज्यों के बीच ऐसी आय के संबंधित हिस्सों के आवंटन, राज्यों को अनुदान सहायता, आपदा प्रबंधन पहलों के वित्तपोषण पर व्यवस्थाओं की समीक्षा आदि पर सिफारिशें शामिल हैं।

पूर्व नौकरशाह एनके सिंह के नेतृत्व में 15वें वित्त आयोग ने सुझाव दिया था कि राज्यों को पांच साल के समय के लिए केंद्र के बांटे जा सकने वाले टैक्स पूल का 41 प्रतिशत दिया जाए, जो 14वें वित्त आयोग द्वारा सुझाव गए स्तर के बराबर है। पहले वित्त आयोग ने आबादी, क्षेत्रफल, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन, राजकोषीय घाटे को कम करने की कोशिश और आय असमानता के आधार पर केंद्रीय कर में राज्यों का हिस्सा तय किया था। कर बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से केंद्र और विपक्ष शासित राज्यों में टकराव का मुद्दा रहा है।

14वें वित्त आयोग का बड़ा फैसला

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाई.वी. रेड्डी के नेतृत्व में 14वें वित्त आयोग ने कर वितरण को विभाज्य निधि के 32% से बढ़ाकर 42% कर दिया जो कि 13वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित था। 14वें वित्त आयोग की ये अनुशंसाएं 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2020 तक लागू रहीं। केंद्रीय कर में राज्यों का हिस्सा तय करने का मुद्दा लंबे समय से केंद्र एवं राज्यों, खासकर विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के बीच विवाद का विषय रहा है। अधिकांश राज्यों का कहना है कि उन्हें उनका उचित हिस्सा नहीं मिला है। दक्षिणी राज्यों ने भी जनसंख्या को विकेंद्रीकरण के मानदंड के रूप में उपयोग किए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने में उनकी सफलता के बावजूद यह उनके साथ अन्याय करता है। गौरतलब है कि 15वें वित्त आयोग ने जनसंख्या को 15%, क्षेत्रफल को 15%, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन को 12.5%, वन आवरण एवं पारिस्थितिकी को 10% और कर एवं राजकोषीय प्रयासों को 2.5% भार दिया था।

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