केन्द्र सरकार ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 242 अवैध वेबसाइट लिंक्स को ब्लॉक कर दिया है।
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 242 अवैध वेबसाइट लिंक्स को ब्लॉक कर दिया है। यह कार्रवाई ऑनलाइन गेमिंग और गैंबलिंग की लत के कारण कर्ज के मकड़जाल में फंसकर युवाओं की आत्महत्याओं की घटनाओं पर लगाम लगाने और युवाओं को होने वाले आर्थिक और सामाजिक नुकसान से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।
242 अवैध ऑनलाइन गेमिंग लिंक्स ब्लॉक
केन्द्र सरकार के सूत्रों ने बताया कि, 'भारत सरकार ने आज 242 अवैध सट्टेबाजी और जुआ वेबसाइटों के लिंक ब्लॉक किए हैं। ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम के लागू होने के बाद से अब तक 7,800 से ज्यादा अवैध सट्टेबाजी और जुआ वेबसाइटों को बंद किया जा चुका है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह कदम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए फैल रहे गैरकानूनी बेटिंग (जुए) पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है।
आसान कमाई का लालच देकर युवाओं को किया जाता है आकर्षित
केन्द्र सरकार के सूत्रों ने कहा कि कई अवैध वेबसाइट्स युवाओं को आसान कमाई का लालच देकर जुए और सट्टेबाजी की ओर आकर्षित करती रहती हैं। इससे कई जगहों पर युवाओं द्वारा भारी कर्ज में फंसकर आत्महत्या की खबरें भी आती रहती हैं। यही नहीं कुछ मामलों में बच्चे अपने ही घरों में चोरी और फर्जी अपहरण की सूचनाएं देकर गैरकानूनी कृत्य में लिप्त पाये गये हैं। इससे न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा था, कई तरह की सामाजिक समस्याएं भी बढ़ रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई का रास्ता अपनाया है।
WHO गेमिंग की लत को माना एक प्रकार की बीमारी
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने भी गेमिंग की लत को एक प्रकार की बीमारी माना है। WHO ने बताया है कि इस लत से व्यक्ति का खुद पर नियंत्रण कमजोर होता है और वह जरूरी गतिविधियों को अनदेखा करता है। समाज में फैल रही इस कुरीति को ध्यान में रखते हुए उठाये गये कदम की जानकारी देते हुए सरकारी सूत्रों ने साफ किया कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आम यूजर्स, खासकर युवाओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी, वित्तीय नुकसान और लत जैसी समस्याओं से बचाना है। अवैध प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण के लिए टेक्नोलॉजी और कानून दोनों का सहारा लिया जा रहा है।
ऑनलाइन मनी गेमिंग पर पिछले साल लगा था बैन
केंद्र सरकार ने ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर पिछले वर्ष बैन लगाया था। इस बैन के खिलाफ कुछ ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां सरकार के खिलाफ कोर्ट पहुंची थी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया था कि अनरेगुलेटेड ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स के आतंकवादियों को फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से लिंक हैं।
सेलेब्रिटीज और इंफ्लुएंसर्स के जरिए की गई आक्रामक मार्केटिंग
सरकार ने कोर्ट में कहा था कि इन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाने के लिए कानून लाना एक उचित कदम है। इसके साथ ही सरकार ने बताया था कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स की सेलेब्रिटीज और इंफ्लुएंसर्स के जरिए आक्रामक तरीके से मार्केटिंग की गई है। इससे ऑनलाइन गेमिंग की पहुंच और असर बढ़ा है। इस समस्या से निपटने के लिए प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट को लागू किया गया है।
ED ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लगभग 523 करोड़ रुपये किए फ्रीज
एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने भी कुछ ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लगभग 523 करोड़ रुपये को फ्रीज किया था। इनमें गेमिंग कंपनियों में WinZO और Gameskraft शामिल हैं। ऑनलाइन मनी गेमिंग पर रोक लगने के बावजूद इन कंपनियों पर प्लेयर्स के करोड़ों रुपये का रिफंड नहीं देने का आरोप है। ED ने बताया था कि WinZO के कस्टमर्स को एल्गोरिद्म्स के साथ खिलाया जाता था। इस गेमिंग प्लेटफॉर्म के कस्टमर्स को यह पता नहीं होता था कि वे रियल मनी गेम्स में लोगों के साथ नहीं, ब्लकि सॉफ्टवेयर के साथ खेल रहे हैं।
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