चीन द्वारा लिथियम आयन बैटरियों के निर्यात पर दी जाने वाली टैक्स की छूट को मौजूदा तीन फीसदी की कटौती किये जाने से भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की कीमतों में आने वाले दिनों में वृद्धि हो सकती है।
1 अप्रैल से लागू होगा नया फैसला
चीन द्वारा लिथियम आयन बैटरियों के निर्यात पर दी जाने वाली टैक्स की छूट को मौजूदा तीन फीसदी की कटौती किये जाने से भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की कीमतों में आने वाले दिनों में वृद्धि हो सकती है। चीन ने 1 अप्रैल से लिथियम आयन बैटरियों के निर्यात पर दी जाने वाली टैक्स की छूट को मौजूदा 9% से घटाकर 6% करने का एलान किया है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माता कंपनियां बैटरी के लिए बहुत हद तक आयात पर निर्भर हैं। इसमें से करीब 80% लीथियम आयन बैटरी का आयात चीन से होता है।
ईवी की लागत में बैटरी की बड़ी हिस्सेदारी
इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माण में कुल कीमत में बैटरी पैक की हिस्सेदारी 30-40% होती है। ऐसे में चीन द्वारा लीथियम आयन बैटरी पर छूट कम करने के फैसले ने भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग की चिंता बढ़ा दी है।
आयात में भारी खर्च
आधिकारिक स्तर से मिली जानकारी के अनुसार चीन से बीते साल कुल 30,249 करोड़ रुपए की ईवी बैटरी आयात की गई। चीन द्वारा छूट घटाने से भारत में आयात होने वाली बैटरी की कीमतों में उछाल आएगा जिसका असर इलेक्ट्रिक वाहन की कीमतों पर पड़ सकता है। ऑटो उद्योग से मिली जानकारी के मुताबिक चीन सरकार अगले एक साल के भीतर इस प्रोत्साहन को पूरी तरह खत्म करने की योजना है।
घटते टैक्स लाभ ने बढ़ाई चिंता
चीन ने यह फैसला ऐसे समय किया है जब पहले ही देश में ईवी को मिलने वाला टैक्स लाभ पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तुलना में कम हो रहा है। वहीं आयातित सेल और कच्चे माल पर निर्भरता के कारण भारतीय निर्मित बैटरियां वर्तमान में चीनी बैटरियों से करीब 20-30% महंगी हैं। ऐसे में ईवी निर्माता कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। भारत में निर्मित और बेचे जाने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों में से केवल 13% ही पीएलआई योजना के मानदंड पूरा करते हैं।
सिर्फ 6 मॉडल ही सफल
46 मॉडलों में से केवल 6 ही 50% घरेलू वेल्यू एडिशन की आवश्यकता को पूरा कर पाए हैं। इनमें टाटा मोटर्स के 5 मॉडल और महिंद्रा का 1 मॉडल शामिल हैं। टेस्ला, हुंडई, बीएमडब्ल्यू और किआ जैसे अन्य लोकप्रिय ब्रांडों में 60% से अधिक आयातित घटक पाए जाते हैं, जो मुख्य रूप से चीन से आयात किए जाते हैं।
भारतीय निर्माताओं के लिए अवसर भी
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार ईवी इकोसिस्टम से जुड़ी ईवी ऊर्जा के सीईओ संयोग तिवारी कहते हैं, चीन द्वारा निर्यात छूट घटाने को भारतीय बैटरी निर्माताओं के लिए एक अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। अब चीनी आयातित बैटरियों और भारत निर्मित बैटरियों की कीमत में अंतर घट जाएगा।
सरकारी प्रोत्साहन बन सकते हैं सहारा
पीएलआई स्कीम जैसे सरकारी प्रोत्साहन और कम्पोनेंट और मिनरल आयात पर छूट से भारतीय निर्माता उचित कीमतों पर देश में ही बैटरी उपलब्ध करा सकते हैं। घरेलू ईवी कंपनियां अपना मार्जिन कम करके ग्राहकों पर बढ़ी कीमत का बोझ डालने से बच सकती हैं।
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