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CBSE के OSM टेंडर में गड़बड़ी का दावा

CBSE के OSM टेंडर में गड़बड़ी का दावा: 12वीं के छात्र सार्थक ने उठाए सवाल

कक्षा 12वीं के एक छात्र सार्थक सिद्धांत ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के OSM टेंडरिंग प्रोसेस पर चिंता जताते हुए कई कमियों को उजागर किया है।

cbse के osm टेंडर में गड़बड़ी का दावा 12वीं के छात्र सार्थक ने उठाए सवाल

Class 12 Student Questions OSM Tendering Process |

नई दिल्ली। कक्षा 12वीं के एक छात्र सार्थक सिद्धांत ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के OSM टेंडरिंग प्रोसेस पर चिंता जताते हुए कई कमियों को उजागर किया है। ये एक खास सर्विस प्रोवाइडर को विशेष सुविधा दिए जाने की ओर इशारा कर रहा है। छात्र ने कई CBSE डॉक्यूमेंट्स की तुलना करते हुए एक ब्लॉग में अपने निष्कर्ष साझा किया है।

टेंडर शर्तों में बदलाव पर जताई चिंता

सार्थक ने कहा कि, "कई खामियां थीं। मैंने अभी दोनों की तुलना की है और मुझे कुछ खामियां मिली है। जैसे मेरे ब्लॉग के अनुसार कम से कम 15 कमियां थीं।" उन्होंने खास तौर पर ऑन स्क्रीन मार्किंग OSM टेंडरिंग प्रोसेस की ओर इशारा किया। CBSE ने तीन अलग-अलग टेंडर जारी किए थे। इनमें से पहला Gem पोर्टल से हटा दिया गया था, दूसरा टेक्निकल इवैल्यूएशन में सभी बिडर्स फेल हो गए थे और तीसरा आखिरकार एक एडुटेक फर्म को दिया गया था।

सिद्धांत ने बताया रिसर्च के पीछे का कारण

सिद्धांत ने ब्लैकलिस्टिंग, फाइनेंशियल क्वालिफिकेशन लिमिट, CMMI लेवल और प्रोजेक्ट क्राइटेरिया से जुड़े मानदंडों में बदलावों पर भी ज़ोर दिया जो कथित तौर पर इंडस्ट्री की बड़ी कंपनी TCS के मुकाबले एडु टेक प्रोवाइडर के फेवर में थे। यह पूछे जाने पर कि उन्होंने यह रिसर्च क्यों की, सिद्धांत ने कहा, "मैं निसर्ग अधिकारी के साथ काम कर रहा था, जो एथिकल हैकर हैं। उन्होंने मुझे कोएम्प्ट के बारे में बताया, तो इससे मेरी दिलचस्पी कोएम्प्ट में बढ़ गई और फिर मैंने दूसरे पत्रकारों के साथ काम किया। मुझे खुद कुछ जानकारी मिली और फिर मैंने वह सब अपने ब्लॉग में पब्लिश कर दिया।"

पारदर्शिता बढ़ाने की उम्मीद

इस बारे में कि क्या उनके काम से सुधार हो सकते हैं, सिद्धांत ने थोड़ी उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि CBSE मेरे सवालों का जवाब देगा। मैंने अपने ब्लॉग के ज़रिए ज़रूरी सवाल उठाए हैं। मुझे उम्मीद है कि CBSE टेंडर सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करेगा। मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार भी यह सुनिश्चित करेगी कि टेंडर सिस्टम, प्रोक्योरमेंट वेबसाइट, सभी ट्रांसपेरेंट हों, डेटा आसानी से डाउनलोड हो सके और जितने ज़्यादा पत्रकार, उतने ज़्यादा मीडिया हाउस इस पर रिपोर्ट करें।"

OSM सिस्टम को बताया सकारात्मक पहल

सिद्धांत ने चल रहे ऑनलाइन स्कैनिंग और मार्किंग (OSM) सिस्टम पर भी प्रतिक्रिया दी जिसका छात्रों और शिक्षकों ने आलोचना की थी। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि OSM एक अच्छा बदलाव है। हालांकि मुझे लगता है कि पहले इसे बड़े पैमाने पर रोलआउट किया जाना चाहिए और अच्छे डेमो होने चाहिए। छात्र ने हाल ही में सरकार की इस घोषणा का स्वागत किया कि अगले साल से मार्क्स के साथ आंसर शीट भी दी जाएंगी। सार्थक ने कहा कि इससे ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी।

सार्थक ने साझा किया कॉपियों की चेकिंग को लेकर अपना अनुभव

सिद्धांत ने इस साल एक कैंडिडेट के तौर पर अपना व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा, "मुझे भी कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मैं कहूंगा कि मैं लकी था। मेरे सारे पेज ब्लर नहीं थे और सब ठीक था। लेकिन मुझे लगा कि चेकिंग में दिक्कतें थीं, मार्किंग में दिक्कतें थीं जिन्हें मैं री-इवैल्यूएशन प्रोसेस के बाद ठीक कर लूंगा।" (ANI)

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