कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने CEC ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। वहीं, वोटर लिस्ट पुनरीक्षण के खिलाफ राहुल गांधी और खड़गे की SC याचिका पर रजिस्ट्री ने 14 आपत्तियां जताई हैं।
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी प्रेस नोट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर बेशर्मी का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को चुनौती देने वाली राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत 'INDIA' गठबंधन के नेताओं की रिट याचिका में 14 कमियां दर्ज की हैं।
चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार पर जयराम रमेश का हमला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक कथित आधिकारिक दस्तावेज साझा करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की हालिया कार्रवाई राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान हुई धांधलियों का ही विस्तार है।
जयराम रमेश ने तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा, "विधानसभा चुनाव को बेहद बेशर्मी और धोखाधड़ी से भाजपा की झोली में डालने के बाद अब CEC ने यह प्रेस नोट जारी करवाया है। ज्ञानेश कुमार की बेशर्मी की कोई सीमा नहीं है।"
बंगाल चुनाव कार्यालय का सफाई में बयान
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने 12 अक्टूबर को एक प्रेस नोट जारी किया था। इसमें कहा गया था, "भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, राज्य के 24 जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) ने एक अभियान शुरू किया है ताकि कोई भी पात्र मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर न छूटे।"
प्रेस नोट में यह भी जानकारी दी गई कि पूरे राज्य में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति को कोई शिकायत है, तो वह सीधे संबंधित बीएलओ (BLO), एईआरओ (AERO), ईआरओ (ERO) या डीईओ (DEO) से बेझिझक संपर्क कर सकता है। कांग्रेस का यह बयान विपक्षी गठबंधन 'INDIA' और चुनाव आयोग के बीच गहराते टकराव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
राहुल गांधी और खड़गे की याचिका पर SC रजिस्ट्री की आपत्तियां
इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और 'INDIA' ब्लॉक के 9 अन्य शीर्ष नेताओं द्वारा दायर रिट याचिका पर 14 तकनीकी खामियां चिह्नित की हैं। यह याचिका ECI द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) के विभिन्न पहलुओं को चुनौती देने के लिए दाखिल की गई थी।
रजिस्ट्री ने विशेष रूप से याचिकाकर्ताओं से यह स्पष्टीकरण मांगा है कि इस संविधानिक याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों- एसएस संधू तथा विवेक जोशी को निजी पक्षकार के रूप में क्यों नामित किया गया है।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल याचिका पर उठे सवाल
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल इस याचिका में विपक्ष ने आरोप लगाया है कि SIR के दौरान चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। नेताओं ने मांग की है कि पोल पैनल द्वारा वोटर लिस्ट संशोधन से जुड़े फैसलों को लेने और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा की जाए।
रजिस्ट्री ने 12 अक्टूबर को अधिसूचित आपत्तियों में याचिकाकर्ताओं को लिस्टिंग प्रोफ़ार्मा में प्रतिवादी का नाम सुधारने, पेज 9 पर दिए गए विवरण को दुरुस्त करने और मुख्य प्रार्थना पत्र में सही प्रतिवादी संख्या दर्ज करने का निर्देश दिया है।
CJI के निर्देश के बाद दायर की गई थी याचिका
12 अक्टूबर को दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR प्रक्रिया, फ़ॉर्म 6 में संशोधन, ECINET व ERONET के परिचालन और मतदाताओं के नाम हटाने व बहाल करने के तौर-तरीकों में पारदर्शिता का अभाव रहा है।
गौरतलब है कि यह याचिका भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के 11 अक्टूबर के उस लिखित निर्देश के बाद दाखिल की गई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि समान मुद्दों वाले मामलों की सुनवाई 13 अक्टूबर को तय है और याचिकाकर्ता अपनी नई याचिका 12 अक्टूबर तक भौतिक रूप से या ई-फाइलिंग के माध्यम से दाखिल कर सकते हैं।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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