पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक पार्टी जनता उन्नयन पार्टी के गठन के महज 24 घंटे के भीतर ही पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर का एक बड़ा फैसला विवादों में आ गया है।
जनता उन्नयन पार्टी में पहले दिन विवाद
पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक पार्टी जनता उन्नयन पार्टी के गठन के महज 24 घंटे के भीतर ही पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर का एक बड़ा फैसला विवादों में आ गया है। बालीगंज विधानसभा सीट से घोषित उम्मीदवार निशा चटर्जी को हटाए जाने के बाद उनके राजनीतिक फैसलों पर सवालिया निशान लगने लगे हैं।
उम्मीदवार चयन में अचानक बदलाव
पार्टी गठन के दिन हुमायूं कबीर ने 2026 विधानसभा चुनाव के लिए आठ सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे। इनमें मुर्शिदाबाद से मनीषा पांडे और कोलकाता की बालीगंज सीट से निशा चटर्जी को उम्मीदवार बनाया गया था। लेकिन 24 घंटे के भीतर ही बालीगंज सीट पर उम्मीदवार बदलने का फैसला कर लिया गया।
हिंदू नेताओं को जगह देने के दावे पर सवाल
हुमायूं कबीर ने पार्टी लॉन्च के समय दावा किया था कि जनता उन्नयन पार्टी केवल मुस्लिमों की पार्टी नहीं होगी और इसमें करीब 30 फीसदी हिंदू नेताओं को सम्मानजनक स्थान दिया जाएगा। ऐसे में सबसे पहले एक हिंदू नेता को उम्मीदवार सूची से हटाने के फैसले ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पार्टी प्रमुख का तर्क
हुमायूं कबीर का कहना है कि सोशल मीडिया पर निशा चटर्जी की कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचने की चर्चा हो रही है। उनका दावा है कि इससे पार्टी की छवि भी प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्हें बालीगंज से उम्मीदवार न बनाने का फैसला लिया गया। अब इस सीट से किसी मुस्लिम उम्मीदवार को उतारने पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।
निशा चटर्जी का पलटवार
इधर, निशा चटर्जी ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हुमायूं कबीर को कोई भी फैसला लेने से पहले उनसे बातचीत करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वह हिंदू ब्राह्मण हैं, इसी कारण उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया गया।
निजी जीवन को राजनीति से जोड़ने पर आपत्ति
निशा चटर्जी ने साफ कहा कि तस्वीरों का मामला उनका निजी विषय है और इसका उनकी राजनीतिक छवि से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म और कला जगत से राजनीति में आई कई महिलाओं की वजह से कभी उनकी पार्टियों की छवि खराब नहीं हुई, फिर उनके मामले में अलग मापदंड क्यों अपनाया गया। पार्टी के गठन के साथ ही शुरू हुए इस विवाद ने जनता उन्नयन पार्टी की आगे की राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
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