दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल ने फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम में शामिल संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
नयी दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल ने फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम में शामिल संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इंटर-स्टेट सेल की विशेष टीम ने इस मामले में चार मुख्य आरोपियों को कोलकाता और लखनऊ से गिरफ्तार किया है।
सोशल मीडिया के ज़रिए निवेशकों को फंसाया
अधिकारियों के मुताबिक गिरोह लोगों को फर्जी ट्रेडिंग ऐप और टेलीग्राम ग्रूप के जरिए अधिक रिटर्न का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे और उनसे करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करते थे। आरोपियों ने पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल किया। शुरुआती संपर्क WhatsApp, Telegram, Instagram और Facebook के ज़रिए आकर्षक विज्ञापनों के ज़रिए किया गया, जिसमें "ऑनलाइन ट्रेडिंग इन्वेस्टमेंट" या "गारंटीड ज़्यादा रिटर्न" का वादा किया गया था। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद इच्छुक पीड़ितों को "Ventura Securities," "Go Market Global," और "IPO Stock Trading" जैसे नामों वाले Telegram ग्रुप में जोड़ा गया, जिसमें असली ब्रोकर होने का नाटक किया गया था।
फर्जी ऐप्स में दिखाया जाता था नकली मुनाफा
उन्होंने आगे बताया कि पीड़ितों से धोखाधड़ी वाले ऐप डाउनलोड करवाए गए, जिनमें नकली ट्रेडिंग डैशबोर्ड दिखाए जाते थे, जिनमें झूठा प्रॉफ़िट दिखाया जाता था। भरोसा बनाने के लिए, शुरुआत में थोड़ी मात्रा में "प्रॉफ़िट" क्रेडिट किया गया, जिससे पीड़ितों को ज़्यादा पैसे इन्वेस्ट करने के लिए बढ़ावा मिला। बाद में, पैसे निकालने के नाम पर टैक्स, फ़ीस या "एक्टिवेशन चार्ज" की मांग की गई।
बिना मंज़ूरी चल रहे थे नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म
पुलिस ने बताया कि ये नकली प्लेटफ़ॉर्म असली ट्रेडिंग एप्लिकेशन जैसे दिखते थे, लेकिन किसी भी रेगुलेटरी अथॉरिटी से उन्हें मंज़ूरी नहीं मिली थी। कोई भी असली ब्रोकर सिर्फ़ बिना वेरिफ़ाई किए गए ऐप या Telegram ग्रुप के ज़रिए काम नहीं करता है। जांच में पता चला कि अपराधियों ने भारत में मौजूद हैंडलर्स के ज़रिए नकली बैंक अकाउंट हासिल किए थे। अकाउंट नंबर, IFSC, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और कस्टमर ID सहित अकाउंट की पूरी जानकारी स्कैमर्स के साथ शेयर की गई थी। पुलिस ने बताया कि इन अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबरों में Mighty App या APK फ़ाइलें इंस्टॉल थीं, जो अपने आप ट्रांज़ैक्शन OTP शेयर कर देती थीं।
I4C डेटा से खुली मनी ट्रेल की परतें
जांच के दौरान, I4C प्लेटफ़ॉर्म से डेटा का एनालिसिस किया गया। कुल 200 से अधिक बैंक शाखाओं से मनी ट्रेल और KYC डिटेल्स की जांच की गई, जिससे नकली प्रोफ़ाइल का इस्तेमाल कर खोले गए करंट अकाउंट का पता चला। कोलकाता में एक सिंडिकेट का पर्दाफ़ाश हुआ, जिसने शेल कंपनियाँ बनाईं और धोखाधड़ी वाले बैंक अकाउंट सप्लाई किए।
कोलकाता से शेल कंपनियों का सिंडिकेट हुआ बेनकाब
पुलिस टीमें नकली कंपनी के पते और आधार से जुड़े मालिक की डिटेल्स वेरिफ़ाई करने के लिए कोलकाता गईं। टेक्निकल सर्विलांस से 29 दिसंबर, 2025 को पश्चिम बंगाल के बैरकपुर, बेलघरिया से बिस्वजीत मंडल को गिरफ़्तार किया गया, जिसके पास से आपत्तिजनक दस्तावेज़ बरामद हुए। पूछताछ के दौरान, मंडल ने बताया कि उसने ये अकाउंट आशीष को बेचे थे, जिसे 1 जनवरी, 2026 को कोलकाता के एक होटल से गिरफ़्तार किया गया था। उसके पास से एक मोबाइल फ़ोन और एक लैपटॉप ज़ब्त किया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, उसने राजीव शाह और हैंडलर शुभम शर्मा की संलिप्तता का भी खुलासा किया।
लखनऊ और कोलकाता में पुलिस ने दी दबिश
राजीव शाह लखनऊ, उत्तर प्रदेश भाग गया और उसे 6 जनवरी, 2026 को गिरफ़्तार किया गया, जबकि शुभम शर्मा को कोलकाता में एक कोऑर्डिनेटेड रेड के दौरान पकड़ा गया। दोनों आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, चेक बुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड बरामद किए गए। पुलिस ने बताया कि राजीव शाह ने पूरे फ्रॉड नेटवर्क को कंबोडिया में बैठे उन ऑपरेटर्स से जोड़ा जो क्रिप्टो ट्रांजैक्शन संभालते थे और पूर्वी उत्तर प्रदेश, कोलकाता और बिहार में काम करने वाले अपने साथियों के नाम भी बताए।
300 करोड़ से ज्यादा की ठगी का अनुमान
पुलिस ने आगे बताया कि 105 फर्जी कंपनियों के नाम पर 260 से ज़्यादा बैंक अकाउंट खोले गए थे, जिसमें अलग-अलग राज्यों से 2,567 NCRP शिकायतें मिली थीं, जिनमें 300 करोड़ रुपये से ज़्यादा का फ्रॉड शामिल था। यह नेटवर्क पिछले चार-पांच सालों से एक्टिव था और टेक्निकल जानकारी और कानूनी कमियों का फायदा उठाकर कानून से बच रहा था।
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