दिल्ली में संसद के पास 20 जुलाई को हुए हिंसक प्रदर्शन पर पुलिस का सख्त एक्शन। हत्या की कोशिश और BNS की धाराओं के तहत पहली FIR दर्ज। जानें पूरी खबर की डिटेल्स।
नई दिल्ली। संसद भवन के पास 20 जुलाई को हुए हिंसक प्रदर्शनों के मामले में दिल्ली पुलिस ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए पहली FIR दर्ज कर ली है। कर्तव्य पथ थाने में दर्ज इस प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) यानी हत्या की कोशिश जैसी बेहद गंभीर धाराओं के साथ कुल 13 प्रावधानों को शामिल किया गया है। ANI द्वारा एक्सेस किए गए एफआईआर के विवरण के अनुसार इस हिंसक झड़प में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों दोनों को गंभीर चोटें आई हैं, जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
कैसे भड़की हिंसा और क्या था पुलिस का एक्शन
यह FIR कर्तव्य पथ पुलिस स्टेशन में तैनात एक इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज की गई है। शिकायत के मुताबिक, इंस्पेक्टर की ड्यूटी सुबह 5:00 बजे C-Hexagon, जोन-11 (पिंक बूथ) पर लगाई गई थी। इसके बाद एक वायरलेस संदेश मिलने पर पुलिस टीम रफ़ी मार्ग पर रेल भवन गोल चक्कर के पास बैरिकेड्स के पास पहुंची, जहां हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जमा थे। पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए लगातार घोषणा कर बताया था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है और प्रदर्शन की कोई अनुमति नहीं है। बावजूद इसके, भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों पर पथराव व चप्पलों से हमला किया। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
उग्र भीड़ का हमला और घायलों के आंकड़े
शिकायत में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उग्र भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर इस मंशा से हमला किया ताकि उनकी जान ली जा सके। इसके परिणामस्वरूप कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके साथ ही सरकारी संपत्ति और निजी वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया है। इस पूरी घटना के बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए पुलिस ने फौरन कानूनी शिकंजा कसा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस हिंसक झड़प में कुल 129 पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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