दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश दिए हैं। जंतर-मंतर प्रदर्शन और संसद मार्च हिंसा के बाद यह कार्रवाई की गई है।
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और गाली-गलौज वाले पोस्ट और वीडियो हटा दें। ये पोस्ट जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च से जुड़ी हिंसा के दौरान अपलोड किए गए थे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया टीम रख रही पैनी नजर
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनों और उसके बाद हुई हिंसा के दौरान अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री के खिलाफ गाली-गलौज वाले कई पोस्ट सामने आए। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ऐसे कंटेंट की पहचान करने के लिए लगातार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को स्कैन कर रही है। आपत्तिजनक पोस्ट का पता चलने पर, संबंधित सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिसमें उन्हें कंटेंट हटाने का निर्देश दिया जा रहा है।
कई भद्दे कमेंट और वीडियो पहले ही हटाए गए
पुलिस ने कहा कि फोर्स द्वारा जारी नोटिस के बाद प्रधानमंत्री के लिए गाली-गलौज वाले कई भद्दे कमेंट और वीडियो पहले ही हटा दिए गए हैं। मॉनिटरिंग का काम जारी है, जिसमें साइबर और सोशल मीडिया टीमें प्रदर्शनों से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही हैं ताकि और आपत्तिजनक पोस्ट की पहचान की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि लागू नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
संसद घेराव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज
यह घटनाक्रम 20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च को लेकर बढ़े राजनीतिक तनाव के बीच हुआ है। इस मार्च के दौरान, NEET और CBSE एग्जाम में अनियमितताओं का विरोध कर रहे छात्र जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करते समय सुरक्षाकर्मियों से भिड़ गए थे। कांग्रेस समेत विपक्ष की ने सोमवार को लोकसभा में कई एडजर्नमेंट मोशन और राज्यसभा में सस्पेंशन ऑफ बिजनेस नोटिस पेश किए। उन्होंने विरोध के दौरान स्टूडेंट्स पर सिक्योरिटी वालों द्वारा किए गए "बेरहमी और गलत" बल प्रयोग पर तुरंत चर्चा की मांग की।
हिंसा में 130 पुलिसकर्मी और 65 छात्र हुए घायल
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 130 पुलिस वाले और करीब 65 छात्र घायल हुए, जबकि हिंसा के सिलसिले में 15 FIR दर्ज की गई हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि जंतर-मंतर और उसके आसपास करीब 3,000 लोगों को तैनात किया गया था, जहां विरोध प्रदर्शन तेज होने के बाद से रोजाना औसतन 10,000 लोग इकट्ठा हो रहे थे।
फेशियल रिकग्निशन सिस्टम से हो रही उपद्रवियों की पहचान
दिल्ली पुलिस ने आगे कहा कि विरोध प्रदर्शन की जगह पर घुसने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान के लिए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है और दावा किया कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,000 से अधिक लोगों की पहचान की जा चुकी है।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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