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फिल्म देव ने बुजुर्गों सुनवाई की मांग की

बांग्ला फिल्म देव का चुनाव अधिकारियों से बुजुर्गों के यहां जाकर सुनवाई करने का किया अनुरोध

बांग्ला अभिनेता व टीएमसी सांसद देव ने चुनाव आयोग से अपील की कि 70 वर्ष से अधिक बुजुर्गों, अस्वस्थ, लाचार व गर्भवती महिलाओं को सुनवाई केंद्र न बुलाया जाए।

बांग्ला फिल्म देव का चुनाव अधिकारियों से बुजुर्गों के यहां जाकर सुनवाई करने का किया अनुरोध

Election Commission of India |

देव ने बुजुर्ग मतदाताओं को राहत देने की मांग

बांग्ला फिल्म के अभिनेता और पूर्व मदिनीपुर जिले के तहत घाटाल लोकसभा क्षेत्र के टीएमसी सांसद देव (दीपक मजुमदार) ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया कि सत्तर साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों, शारीरिक रूप से अस्वस्थ या लाचार लोगों और गर्भवती महिलाओं को सुनवाई केंद्र पर न बुलाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में चुनाव अधिकारियों को स्वयं उनके घर जाकर एसआईआर के तहत सुनवाई करनी चाहिए।

सांसद या अभिनेता नहीं, एक आम नागरिक की अपील

टीएमसी सांसद देव ने स्पष्ट किया कि वे यह बात सांसद या अभिनेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक साधारण नागरिक और मतदाता के रूप में कह रहे हैं। उन्होंने इसे अपना कर्तव्य बताया और कहा कि एसआईआर एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन इसे जल्दबाजी में एक-दो महीने के भीतर पूरा करने के बजाय कम से कम एक साल का समय देकर किया जाना चाहिए।

गणना फार्म में गड़बड़ी के कारण बुलाया गया था सुनवाई के लिए

चुनाव अधिकारियों ने गणना फार्म में कथित गड़बड़ी के चलते देव को सुनवाई के लिए बुलाया था। इसके बाद वे जादवपुर के काटजूनगर स्थित सुनवाई केंद्र पहुंचे, जहां उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज चुनाव अधिकारियों को दिखाए।

मानवता के नजरिए से सोचे चुनाव आयोग

अभिनेता देव ने कहा कि चुनाव आयोग को मानवता के आधार पर बुजुर्गों, अस्वस्थ व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं की असुविधाओं को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि लंबी लाइनों में देर तक खड़े रहना इन लोगों के लिए बेहद कष्टदायक होता है।

युवाओं के लिए लाइन में लगना स्वीकार्य

देव ने कहा कि जो लोग युवा हैं, स्वस्थ हैं और सक्षम हैं, उनके लिए लाइन में खड़े रहना और थोड़ा कष्ट सहना स्वीकार्य हो सकता है, लेकिन हर वर्ग पर एक जैसे नियम लागू करना उचित नहीं है।

लोकतंत्र की मजबूती में चुनाव की भूमिका

उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया भर में एक लोकतांत्रिक देश के रूप में सम्मान मिलता है और यहां चुनाव को पर्व की तरह मनाया जाता है। चुनाव एक बड़ा लोकतांत्रिक अधिकार है और इसके नियम-कायदों का पालन करना लोकतंत्र को मजबूत करता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुनवाई के लिए बुलाए जाने पर वे बिना किसी नानुकुर के वहां पहुंचे।

2002 के बाद वोट देने वालों पर उठाया सवाल

देव ने सवालिया लहजे में कहा कि जिन लोगों ने 2002 के बाद हुए विधानसभा या लोकसभा चुनावों में वोट दिया है, क्या वे मतदाता नहीं हैं? ऐसे लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित कैसे किया जा सकता है।

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