'डायमंड' शब्द का प्रयोग सिर्फ प्राकृतिक हीरे के लिए ही किया जाएगा। कृत्रिम रूप से तैयार किसी भी हीरा की वेरायटी के लिए 'डायमंड' शब्द का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा।
बीआईएस ने जारी किया नया मानक
डायमंड' शब्द का प्रयोग सिर्फ प्राकृतिक हीरे के लिए ही किया जाएगा। कृत्रिम रूप से तैयार किसी भी हीरा की वेरायटी के लिए 'डायमंड' शब्द का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। "ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड" (बीआईएस) ने खरीददारों में व्याप्त भ्रम को समाप्त करने के उदेश्य से इस शब्दावली को मंजूरी दी है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) ने हीरों से जुड़ी शब्दावली को लेकर नए और स्पष्ट नियम लागू किए हैं। यह नियम हीरा खरीदारों को भ्रम से बचाने के लिए जारी किये गये हैं। इससे अब डायमंड की सही पहचान आसान हो जाएगी। यह नया मानक (IS 19469:2025) भारतीय ज्वैलरी मार्केट में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उपभोक्ताओं को प्राकृतिक और प्रयोगशाला-निर्मित हीरों के बीच स्पष्ट अंतर करने में मदद करेगा।
लैब में बने हीरों के लिए अलग नाम अनिवार्य
बीआईएस द्वारा जारी नए नियम के अनुसार बिना किसी अतिरिक्त शब्द के 'डायमंड' का इस्तेमाल सिर्फ प्राकृतिक हीरे के लिए होगा। विक्रेता इसे नैचुरल, रियल, जेनुइन या प्रीशियस कह सकते हैं। जबकि लैब में बने हीरों को हमेशा लैबोरेटरी-ग्रोन डायमंड या 'लैबोरेटरी-क्रिएटेड डायमंड लिखना होगा। कृत्रिम हीरों के लिए एलजीडी, लैब-ग्रोन या लैब डायमंड' जैसे छोटे नाम अब इस्तेमाल नहीं हो सकेंगे। साथ ही गुमराह करने वाले शब्दों पर रोक लगेगी। ऐसे हीरों के लिए 'नेचुरल', 'अर्थ-फ्रेंडली' या 'कल्चर्ड', 'लैब-ग्रोन प्योर' जैसे शब्द' लैब-ग्रोन' जैसे भ्रामक शब्दों का प्रयोग प्रतिबंधित होगा। इनके लिए केवल "लैबोरेटरी-ग्रोन डायमंड" या "लैबोरेटरी-क्रिएटेड डायमंड" जैसे शब्द ही इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
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