दवाओं की अनधिकृत बिक्री और दुरुपयोग की रिपोर्टों के बाद राष्ट्रीय औषधि नियामक ने जीएलपी-1 आधारित वजन घटाने वाली दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला पर अपनी निगरानी तेज कर दी है।
नई दिल्ली। दवाओं की अनधिकृत बिक्री और दुरुपयोग की रिपोर्टों के बाद राष्ट्रीय औषधि नियामक ने जीएलपी-1 आधारित वजन घटाने वाली दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला पर अपनी निगरानी तेज कर दी है। देश भर में ऑनलाइन फार्मेसियों, थोक विक्रेताओं और स्वास्थ्य क्लीनिकों सहित 49 विभिन्न स्थानों पर मंगलवार को समन्वित निरीक्षण करने के बाद औषधि नियामक ने यह कदम उठाया है।
बिना पर्चे के दवा के प्रचार पर रोक
इस कार्रवाई का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना और यह सुनिश्चित करना है कि इन विशेष दवाओं का वितरण अवैध माध्यमों से न हो। हाल ही में, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने दवा कंपनियों को आम जनता को बिना 'प्रिस्क्रिप्शन' वाली वजन घटाने की दवाओं को बढ़ावा देने के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों का कहना है कि इस निर्देश का सभी को पालन करना चाहिए।
90 से ज्यादा दवाओं के कॉम्बिनेशन की जांच
दूसरी ओर, सोमवार को, भारतीय औषधि नियंत्रक जनरल (डीसीजीआई) ने अनधिकृत फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) पर देशव्यापी कार्रवाई शुरू की। एएनआई को प्राप्त एक पत्र के अनुसार, औषधि नियामक ने जेनेरिक नाम से 90 एफडीसी की जांच करने का अनुरोध किया है, यह देखने के लिए कि क्या राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के औषधि नियंत्रकों द्वारा इन्हें मंजूरी दी गई है। इन दवाओं में मल्टीविटामिन, फोलिक एसिड, सिरप, पैरासिटामोल, क्लोट्रिमेज़ोल और बीटामेथासोन क्रीम, डाइक्लोफेनाक पोटेशियम और डाइसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट आदि शामिल हैं।
सस्ती जेनेरिक दवाओं के साथ सावधानी जरूरी
वहीं, AIIMS के एंडोक्रिनोलॉजी और मेटाबॉलिज्म विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. निखिल टंडन के अनुसार, जेनेरिक जीएलपी-1 भारतीय बाजार में पहले से उपलब्ध इनोवेटर उत्पादों की तुलना में भारी छूट पर उपलब्ध है। डॉ. निखिल टंडन ने एएनआई को बताया, 'इसका (जेनेरिक सेमाग्लूटाइड का) सेवन लापरवाही से नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये एक गंभीर समस्या के लिए गंभीर दवाएं हैं। लोगों को सावधान रहना चाहिए, क्योंकि इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं।'
मधुमेह से वजन घटाने तक का सफर
जीएलपी-1 के बारे में उन्होंने कहा, 'जीएलपी-1 का उपयोग शुरू में मधुमेह प्रबंधन के लिए किया जाता था, लेकिन बाद में इसका वजन पर प्रभाव पाया गया।' इससे पहले, प्रसिद्ध मधुमेह विशेषज्ञ और डॉ. मोहन डायबिटीज स्पेशलिटीज सेंटर और मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. वी. मोहन ने कहा, 'कड़ी फार्माकोविजिलेंस बनाए रखना आवश्यक है।' 'हालांकि ये दवाएं बेहद असरदार और काफी हद तक सुरक्षित हैं, फिर भी इनके दुष्प्रभाव हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए भारत से और अधिक डेटा जुटाने की जरूरत है।'
बिना डॉक्टरी सलाह के सेवन है खतरनाक
उन्होंने आगे कहा कि इन दवाओं को योग्य डॉक्टरों द्वारा ही निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा- 'इससे ये अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकेंगी और गुणवत्ता महत्वपूर्ण है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे इन दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और देखरेख में ही करें, क्योंकि ये दवाएं बहुत शक्तिशाली हैं और कुछ लोगों में दुष्प्रभाव पैदा कर सकती हैं।'
यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/state/bomb-threat-to-delhi-assembly-and-speaker-sparks-security-alert/151330
दिल्ली विधानसभा और स्पीकर को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट