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न्यूज़क्लिक मामले में ED पहुंची सुप्रीम कोर्ट

न्यूज़क्लिक केस में ED की सुप्रीम कोर्ट में दस्तक, FIR रद्द करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

न्यूज़क्लिक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली हाई कोर्ट के FIR रद्द करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

न्यूज़क्लिक केस में ed की सुप्रीम कोर्ट में दस्तक fir रद्द करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

representative image | file photo

नई दिल्ली (भारत)। प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी ) ने सुप्रीम कोर्ट (एससी) सेदिल्ली हाई कोर्ट का मई 2026 का आदेश जिसमें न्यूज़क्लिक मामले में इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) की FIR रद्द कर दी गई थी। एजेंसी ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने ज़रूरी सबूतों को नज़रअंदाज़ किया और रिट पिटीशन के स्टेज पर मिनी-ट्रायल किया। ED की स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया था कि इस मामले में इंडियन पीनल कोड (IPC) के सेक्शन 420 और 120-B के तहत धोखाधड़ी और क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी के ज़रूरी तत्व नहीं बनते।

शेयर 11,500 रुपये प्रति शेयर की ज़्यादा कीमत पर जारी

एजेंसी ने तर्क दिया है कि हाई कोर्ट ने ईमेल, बयान और दूसरे मटीरियल पर विचार नहीं किया, जिनसे कथित तौर पर पता चलता है कि फंडिंग का इंतज़ाम पहले से प्लान किया गया था। इसने यह भी कहा है कि कोर्ट ने ED और पुलिस के सबूतों पर ठीक से विचार किए बिना PPK न्यूज़क्लिक के पेश किए गए मटीरियल पर ज़्यादा भरोसा किया। ईडी के अनुसार , पीपीके न्यूज़क्लिक को 2018 में एक अमेरिकी कंपनी से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के रूप में 9.60 करोड़ रुपये मिले। एजेंसी का आरोप है कि शेयर 11,500 रुपये प्रति शेयर की ज़्यादा कीमत पर जारी किए गए थे और ये फंड नेविल रॉय सिंघम से जुड़े थे , जिन्हें एजेंसी ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ा बताया है।

फंडिंग का मकसद प्रोपेगैंडा एक्टिविटीज़ के लिए चुपके से पैसे भेजना

एजेंसी का आरोप है कि इस फंडिंग का मकसद जानकारी और प्रोपेगैंडा एक्टिविटीज़ के लिए चुपके से पैसे भेजना था। 2020 में, दिल्ली पुलिस की EOW ने IPC के सेक्शन 120-B और 420 के तहत FIR दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट (UAPA) के तहत और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) के तहत भी अलग-अलग FIR दर्ज की थीं। इसके बाद ED ने दो FIR के संबंध में दो एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) रजिस्टर कीं।

फॉरेन एक्सचेंज उल्लंघन की शिकायत दर्ज

9.60 करोड़ रुपये के एफडीआई के अलावा, एजेंसी ने पीपीके द्वारा सिंघम से जुड़ी कंपनियों से सेवाओं के कथित निर्यात के बदले कथित रूप से प्राप्त 92 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पहचान की, जो ईडी के अनुसार अस्तित्व में नहीं थी। एजेंसी का यह भी आरोप है कि इस फंड का कुछ हिस्सा PPK के मालिक प्रबीर पुरकायस्थ ने दिल्ली के साकेत इलाके में एक फ्लैट खरीदने के लिए इस्तेमाल किया था। ED ने इस मामले में 4.93 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच की है। 2025 में, ED ने न्यूज़क्लिक और पुरकायस्थ के खिलाफ लगभग 92 करोड़ रुपये के कथित फॉरेन एक्सचेंज उल्लंघन की शिकायत दर्ज की।

PPK और पुरकायस्थ पर 184 करोड़ रुपये का जुर्माना

एजेंसी के मुताबिक, कंपनी ने न्यूज़ सेक्टर में विदेशी निवेश पर लागू पाबंदियों और मंज़ूरी की ज़रूरतों से बचने के लिए न्यूज़ एंटिटी के तौर पर अपना स्टेटस छिपाया। साथ ही, कंपनी पर आरोप है कि उसने बिना ज़रूरी डॉक्यूमेंट के कथित एक्सपोर्ट पेमेंट के ज़रिए करीब 82 करोड़ रुपये लिए। फरवरी 2026 में FEMA की कार्रवाई में PPK और पुरकायस्थ पर 184 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। ईडी ने तर्क दिया है किदिल्ली हाई कोर्ट के EOW FIR रद्द करने के फैसले से इससे जुड़ी मनी-लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई पर असर पड़ा है। एजेंसी का कहना है कि आरोपों और सपोर्टिंग मटीरियल की रिट पिटीशन स्टेज पर पक्के तौर पर जांच करने के बजाय आगे जांच की ज़रूरत है।

ED 2021 से अपनी जांच आगे नहीं बढ़ा रहा

SLP में यह भी बताया गया है कि कोर्ट के ज़बरदस्ती कार्रवाई पर रोक लगाने के निर्देशों के कारण ED 2021 से अपनी जांच आगे नहीं बढ़ा पा रहा है। इसके अलावा, एजेंसी ने चिंता जताई है कि हाई कोर्ट ने सुनवाई खत्म होने के छह महीने बाद अपना फैसला सुनाया और कहा जाता है कि वह ED की ज़रूरी बातों को रिकॉर्ड करने में नाकाम रहा।

(इनपुटः ANI)

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