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EU ने बढ़ाई भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें

यूरोपीय यूनियन ने बढ़ायी भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें

अमेरिका के बाद EU ने भी भारत की GSP छूट निलंबित की, 87% सामान पर पूरा टैक्स लगेगा, जिससे निर्यात महंगा होगा।

यूरोपीय यूनियन ने बढ़ायी भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें

Indian Exporters |

टेक्सटाइल और प्लास्टिक सेक्टर पर सीधा असर

अमेरिका के बाद अब यूरोपियन यूनियन (EU) ने भी भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यूरोपीय संघ ने तरजीही देशों (फेवर्ड नेशन) की श्रेणी के रूप में भारत को निर्यात में मिलने वाली छूट कुछ दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। इसके तहत भारतीय निर्यात पर मिलने वाली विशेष रियायत (GSP) को खत्म कर दिया गया है। यह छूट खत्म होने के बाद अब 87% भारतीय सामानों पर पूरा टैक्स लगेगा। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय देशों में सामान भेजना महंगा हो जाएगा। अमेरिका के बाद अब यूरोपीय यूनियन के इस फैसले ने भारत के टेक्सटाइल और प्लास्टिक जैसे कई सेक्टरों के निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 1 जनवरी से लागू होने वाले इस फैसले का असर यूरोपीय देशों के 27 देशों के समूह में भारतीय सामान भेजने की लागत पर पड़ेगा। यह खबर ऐसे समय में आई है जब भारत और यूरोपीय यूनियन 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत पूरी करने का ऐलान करने वाले हैं।

2026 से 2028 तक लागू रहेगा नया नियम

यूरोपीय यूनियन के आधिकारिक गजट के अनुसार यूरोपीय कमीशन ने 25 सितंबर 2025 को नए नियम तय किए हैं। इसके तहत भारत, इंडोनेशिया और केन्या को मिलने वाली कुछ खास व्यापारिक छूट को 2026 से 2028 तक के लिए निलंबित कर दिया गया है। यह फैसला 1 जनवरी 2026 से लागू होगा और 31 दिसंबर 2028 तक प्रभावी रहेगा। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक इस फैसले से यूरोपीय संघ के बाजार में भी बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि वरीयता योजना के लाभों को निलंबित करने के बाद ईयू को होने वाले निर्यात पर शुल्क बढ़ जाएगा।

सिर्फ 13% सामानों को मिलेगी राहत

यूरोपीय यूनियन द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार अब इस स्कीम के तहत खेती और चमड़े से जुड़े सिर्फ 13% सामानों को ही पहले की तरह टैक्स छूट मिलेगी। अभी तक जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) के कारण भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में सामान्य से कम टैक्स देना पड़ता था। लेकिन अब भारत के 87% सामानों से यह रियायत छीन ली गई है। यूरोपीय यूनियन ने खनिज, केमिकल, प्लास्टिक, रबर, कपड़े, पत्थर, सिरेमिक, कीमती धातुएं, लोहा और स्टील, मशीनरी, बिजली के सामान और ट्रांसपोर्ट उपकरण जैसे लगभग सभी बड़े सेक्टरों से यह छूट हटा दी है। ये सेक्टर भारत से यूरोप होने वाले निर्यात की रीढ़ माने जाते हैं।

भारत-ईयू व्यापार के आंकड़े

थिंक टैंक GTRI के अनुसार 2024-25 में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच कुल 136.53 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ। यूरोपीय यूनियन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और भारत के कुल निर्यात का करीब 17% हिस्सा यूरोपीय बाजार में जाता है। यूरोपियन यूनियन समय-समय पर इन लाभों को कम करता रहा है। 2013 और 2023 में भी ऐसी ही कटौती की गई थी। अब 2026 से 2028 तक तीन वर्षों के लिए ये रियायतें वापस ले ली गई हैं। इन रियायतों को वापस लेने की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि दोनों पक्ष 27 जनवरी को मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। इस फैसले के बाद भारत और ईयू के बीच एफटीए को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

निर्यातकों के लिए आगे की राह मुश्किल

अनुमान है कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एफटीए के कार्यान्वयन में कम से कम एक वर्ष या उससे अधिक समय लग सकता है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों को उच्च शुल्क, बढ़ती अनुपालन लागत और कमजोर प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। वैश्विक व्यापार की नाजुक परिस्थितियों में यह फैसला भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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