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किसानों की नाराजगी से सीएम प्रोजेक्ट रुका

किसानों की नाराजगी, मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट रुका

क्रसर- सिलाखेड़ी-सेवरखेड़ी डेम परियोजना का काम दस दिन से रुका किसान कर रहे हैं जमीन के बदले मुआवजा बढ़ाने की मांग

किसानों की नाराजगी मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट रुका

Silakhedi-Severkhedi Dam |

डेम का काम 10 दिन से ठप

क्रसर- सिलाखेड़ी-सेवरखेड़ी डेम परियोजना का काम दस दिन से रुका किसान कर रहे हैं जमीन के बदले मुआवजा बढ़ाने की मांग सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी डैम का काम 10 दिन से ठप है। काम नहीं हो रहा है। मालूम हो कि यह परियोजना सिंहस्थ कुंभ और शिप्रा नदी को पूरे साल प्रवाहमान बनाने के लिए यह प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है। किसानों में आक्रोश है और प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने मिलकर काम कर रहे 200 से अधिकारी, कर्मचारी और मजदूर को वापस लौटने को मजबूर कर दिया है।

मुआवजा विवाद से बढ़ी परेशानी

इसकी वजह है कि किसान डैम के बदले अधिग्रहित की जा रही जमीन के मुआवजे को लेकर विरोध कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि प्रशासन जमीन का मुआवजा सिर्फ 3 से 6 लाख रुपये प्रति बीघा तय कर रहा है। पर जमीन का बाजार मूल्य 50 से 1 करोड़ रुपये प्रति बीघा है।

मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट भी अटका

शिप्रा नदी को प्रवाहमान रखने के लिए शहर से 17 किमी दूर कल्याणपुरा गांव में मुख्यमंत्री यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट सिलाखेड़ी-सेवरखेड़ी परियोजना का काम मार्च में शुरू हुआ था। डैम के निर्माण का लगभग 25 फीसदी काम पूरा हो चुका है।

400 बीघा जमीन का अधिग्रहण प्रस्तावित

इस परियोजना में सिलारखेड़ी से सेवरखेड़ी तक पाइपलाइन बिछाना है। इसके लिए 13 गांव के करीब 300 किसानों की करीब 400 बीघा जमीन का अधिग्रहण होना है। कल्याणपुरा में डैम का निर्माण शुरू हो चुका है।

कम मुआवजा मिलने से किसानों में नाराजगी

पर मुआवजा कम होने से किसान नाराज हैं और 21 नवंबर से काम बंद करवा दिया है। किसान मांग कर रहे हैं कि मुआवजा 25 लाख रुपये प्रति बीघा किया जाए।

किसान नेताओं ने अधिकारियों से की कई बार बात

उधर, किसान नेता दिलीप सिंह सिसोदिया ने कहा, अगस्त से वे उज्जैन कलेक्टर, कमिश्नर, विधायक, एसडीएम सभी से बात कर चुके हैं, पर कोई समाधान नहीं निकला। 29 नवंबर को किसान मुख्यमंत्री से मिले। इसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रशासन को उचित मुआवजा देने के निर्देश दिए थे।

प्रशासन और किसानों की बात में फासला अभी भी बरकरार

फिर भी प्रशासन 17.50 लाख रुपये प्रति बीघा तक ही देने को तैयार है। किसान 25 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं।

परियोजना पर संशय के बादल

इधर, डैम के निर्माण का काम किसानों के विरोध के कारण पूरी तरह ठप है। इससे परियोजना पूरा होने को लेकर भी संशय खड़ा हो गया है।

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