ग्लोबल ई-कॉमर्स मर्चेंट तेज़ी से रियल-टाइम पेमेंट (आरटीपी) अपना रहे हैं, क्योंकि लगातार कई सालों की बढ़ोतरी के बाद फ्रॉड दरों में कमी के संकेत दिख रहे हैं।
नई दिल्ली। ग्लोबल ई-कॉमर्स मर्चेंट तेज़ी से रियल-टाइम पेमेंट (आरटीपी) अपना रहे हैं, क्योंकि लगातार कई सालों की बढ़ोतरी के बाद फ्रॉड दरों में कमी के संकेत दिख रहे हैं। यह जानकारी वीज़ा की 2025 ग्लोबल ई-कॉमर्स पेमेंट्स एंड फ्रॉड रिपोर्ट में दी गई है। कुल 38 देशों के 1,080 से ज़्यादा मर्चेंट के सर्वे पर आधारित इस रिपोर्ट में पाया गया है कि 37 प्रतिशत मर्चेंट अब रियल-टाइम पेमेंट स्वीकार करते हैं और यह गति तेजी से बढ़ रही है।
आरटीपी अस्वीकार करने वाले 42 प्रतिशत मर्चेंट की अगले एक साल में जुड़ने की है संभावना
जो लोग पहले से ही आरटीपी दे रहे हैं, उनमें से लगभग 80 प्रतिशत ने पिछले साल ग्राहक उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि की सूचना दी, जबकि लगभग 90 प्रतिशत को 2025 में और वृद्धि की उम्मीद है। यहां तक कि जो मर्चेंट अभी तक आरटीपी स्वीकार नहीं करते हैं, उनमें से 42 प्रतिशत का कहना है कि वे अगले 12 महीनों के भीतर इसे जोड़ने की संभावना रखते हैं, जिससे रियल-टाइम पेमेंट विश्व स्तर पर सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले स्वीकृति तरीकों में से एक बन गया है।
3.4 प्रतिशत से घटकर 3.0 प्रतिशत हो गई फ्रॉड दरें
बढ़ते ट्रांज़ैक्शन वॉल्यूम के बावजूद, मर्चेंट समग्र फ्रॉड परिणामों में सुधार की रिपोर्ट कर रहे हैं। ऑर्डर के हिसाब से फ्रॉड दरें साल-दर-साल 3.4 प्रतिशत से घटकर 3.0 प्रतिशत हो गईं, जबकि ऑर्डर अस्वीकृति दरें 5.8 प्रतिशत से घटकर 5.0 प्रतिशत हो गईं, जिससे कई सालों से चले आ रहे बढ़ते रुझान में उलटफेर हुआ।
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