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भारत में प्रोडक्शन में मामूली गिरावट...

ब्राजील में अधिक उत्पादन के कारण वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमतों में गिरावट

ब्राजील में इस वर्ष चीनी के बंपर उत्पादन और अधिक आपूर्ति के कारण वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमतों में गिरावट आई है।

ब्राजील में अधिक उत्पादन के कारण वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमतों में गिरावट

Global Sugar Prices Drop Due to Brazil Supply |

नई दिल्ली। ब्राजील में इस वर्ष चीनी के बंपर उत्पादन और अधिक आपूर्ति के कारण वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमतों में गिरावट आई है। हालांकि, भारत में ईथेनॉल के लिए की मांग चीनी उत्पादन में हल्की गिरावट के बावजूद चीनी उद्योग का दृष्टिकोण अभी भी स्थिर बना हुआ है। इससे घरेलू बाजार में कीमत में गिरावट की संभावना नहीं है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने ताजा रिपोर्ट में कहा है कि ब्राजील से अधिक आपूर्ति के कारण वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमतें तेजी से गिर गई हैं, जबकि भारतीय चीनी क्षेत्र का दृष्टिकोण स्थिर बना हुआ है।

एक साल में ही गिर गए चीनी के अंतरराष्ट्रीय दाम

इक्रा के अनुसार, वैश्विक बाजार में फरवरी 2026 में कच्ची चीनी की कीमत 313 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर आ गई है, जो पिछले वर्ष समान महीने में 445 डॉलर प्रति मीट्रिक टन थी। इसी तरह, सफेद चीनी की कीमत फरवरी 2025 की 532 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से घटकर पिछले महीने 408 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर आ गई है। फरवरी 2026 में सफेद और कच्ची चीनी के बीच प्रीमियम 95 डॉलर प्रति मीट्रिक टन रहा, जबकि फरवरी 2025 में यह 87 डॉलर प्रति मीट्रिक टन था।

ब्राजील की 'चीनी बाढ़' ने बढ़ाई वैश्विक बाजार की मुश्किलें

रेटिंग एजेंसी ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, शुगर वर्ष 2026 (SY2026) में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी की कीमतें मौजूदा उत्पादन लागत और भारत के घरेलू दामों से भी नीचे बनी हुई हैं। इसका प्रमुख कारण ब्राजील से वैश्विक बाजार में आई अतिरिक्त चीनी आपूर्ति है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्राजील की अधिशेष आपूर्ति के कारण वैश्विक चीनी कीमतों में तेज गिरावट आई है।

वैश्विक खपत कम और उत्पादन ज्यादा

रिपोर्ट के अनुसार, शुगर वर्ष 2025-26 में वैश्विक चीनी उत्पादन लगभग 189.3 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है। वहीं वैश्विक खपत 178.1 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो सालाना आधार पर लगभग 1 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में मांग और आपूर्ति की स्थिति संतुलित बनी हुई है।

एथेनॉल की ओर बढ़ी चीनी, उत्पादन में उछाल के संकेत

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, शुगर वर्ष 2026 में भारत का सकल चीनी उत्पादन 9.4 प्रतिशत बढ़कर 32.41 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 29.6 मिलियन मीट्रिक टन था। करीब 3.1 मिलियन मीट्रिक टन चीनी के एथेनॉल उत्पादन में जाने के बाद शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 29.3 मिलियन मीट्रिक टन रहने की संभावना है।

घरेलू मांग और स्टॉक की स्थिति: मिलों के मुनाफे में सुधार

देश में लगभग 28.3 मिलियन मीट्रिक टन खपत और 0.7 मिलियन मीट्रिक टन निर्यात को ध्यान में रखते हुए, सीजन के अंत में चीनी का भंडार लगभग 5.6 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो करीब दो महीने की खपत के बराबर है। ICRA के अनुसार एकीकृत चीनी मिलों के परिचालन लाभ मार्जिन वित्त वर्ष 2026 में लगभग 10 से 10.5 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है, जबकि पिछले वर्ष यह 9.6 प्रतिशत था। रिपोर्ट में कहा गया है कि लाभप्रदता बेहतर गन्ना उपलब्धता, घरेलू बाजार में मजबूत चीनी कीमतों और डिस्टिलरी (एथेनॉल) सेगमेंट के संतोषजनक प्रदर्शन के कारण बनी हुई है।

आमदनी लगभग स्थिर रहने की उम्मीद

वित्त वर्ष 2026 में एकीकृत चीनी मिलों की आय में 5 से 8 प्रतिशत तक मध्यम वृद्धि होने का अनुमान है, जिसे बेहतर गन्ना उपलब्धता और स्थिर चीनी कीमतों से समर्थन मिलेगा। हालांकि गन्ने के दाम बढ़ने और एथेनॉल की कीमतों में अधिक बदलाव न होने के कारण मार्जिन लगभग स्थिर रहने की उम्मीद है।

एथेनॉल मिश्रण में बड़ी उपलब्धि

भारत एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में भी लगातार प्रगति कर रहा है। एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में मिश्रण दर 19.98 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसमें कुल 239 करोड़ लीटर एथेनॉल मिलाया गया। इसमें जनवरी 2026 में 59.2 करोड़ लीटर एथेनॉल शामिल है। शुगर वर्ष 2026 के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) 15 रुपये बढ़ाकर 355 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो 10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी दर पर आधारित है। वहीं उत्तर प्रदेश में राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) को बढ़ाकर जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्मों के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

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